फिल्म ‘फायर’ में अपने इस हॉट सीन के लिए आज भी जानी जाती हैं शबाना आजमी
Ahabana Azmi Biography in Hindi: महज 3 साल में तीन बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं शबाना आजमी| शबाना आजमी हिंदी सिनेमा जगत की एक ऐसी अदाकारा हैं जो किसी भी किरदार को करने से पहले अपने आपको उसमें पूरी तरह से ढाल लेती हैं। शबाना आजमी आज भी हिंदी सिनेमा जगत से जुड़ी हुई हैं। शबाना केवल फिल्मों में ही नहीं बल्कि सामाजिक कार्यों में भी बेहद ही लगाव रखती हैं। आए दिन शबाना सामाजिक कार्यों की मदद से जरूरतमंदों की सहायता करती हैं। शबाना आजमी हिंदी सिनेमा जगत के जाने-माने लेखक और संगीतकार जावेद अख्तर की पत्नी हैं। शबाना से निकाह करने से पहले से ही जावेद अख्तर शादीशुदा थें। लेकिन शबाना के प्यार में पड़ने के बाद उन्होंने अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी को तलाक दे दिया और शबाना से शादी कर ली।
शबाना आजमी के पिता का नाम कैफी आज़मी है। जो कि खुद एक जाने-माने शायर और कवि रह चुके हैं। शबाना की मां शौकत आज़मी भी एक जानी-मानी थिएटर आर्टिस्ट रह चुकी हैं। अपनी मां के नक्शे कदम पर चलते हुए शबाना आजमी ने भी अभिनय की दुनिया में आने का सोचा और उन्होंने बॉलीवुड के सफर की शुरुआत की।
शबाना आज़मी की प्राथमिक पढ़ाई मुंबई के क्वीन मैरी स्कूल से हुई है। उन्होंने मुंबई स्थित सेंट जेवियर कॉलेज से साइकोलॉजी में स्नातक की डिग्री हासिल की। शबाना ने एक्टिंग का कोर्स पुणे स्थित फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट से किया।
फिल्मी करियर की शुरुआत
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शबाना आज़मी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1973 में श्याम बेनेगल की फिल्म अंकुर से की थी। शबाना की पहली फिल्म सफल रही और उन्होंने बॉलीवुड में अपने पैर जमा लिए। शबाना ने अपनी पहली फिल्म से ही लोगों को अपने एक्टिंग का लोहा मनवा दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।
फिल्म अंकुर के बाद अगले 3 साल तक लगातार उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलता रहा। उनकी फिल्म ‘अर्थ’, ‘खंडहर’ और ‘पार’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। महज 3 साल में शबाना आजमी बॉलीवुड में एक जानी-मानी अभिनेत्री के तौर पर उभरीं। यह दौर ग्लैमर का था। लेकिन शबाना ने खुद को इस दुनिया से अलग रखा और अपनी एक अलग पहचान बनाई। आने वाले समय में उन्होंने अर्थ, निशांत, अंकुर, स्पर्श, मंडी, मासूम, पेस्टॅन जी में शबाना आजमी ने अपने अभिनय की अमिट छाप दर्शकों पर छोड़ी। ऐसा नहीं है कि शबाना आजमी ने उन फिल्मों में काम नहीं किया जिन्हें आम दर्शक भी देखना पसंद करते हैं। फिल्म अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, मैं आजाद हूं जैसी व्यावसायिक फिल्मों में अपने अभिनय के दम पर उन्होंने अपना एक अलग अवतार दिखाया।
कब-कब विवादों में आईं शबाना आजमी
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शबाना आजमी अपने फिल्मों के कारण कई बार विवादों में भी रहीं। फिल्म ‘फायर‘ में उन्होंने अपने किरदार के लिए बाल मुंडवा लिए थें। इतना ही नहीं इस फिल्म में उन्होंने अभिनेत्री नंदिता दास के साथ किसिंग सीन भी किया था। जिसके कारण वह काफी विवादों में रहीं थीं। फिल्मों के अलावा शबाना आजमी की नॉर्मल लाइफ भी विवादों में घिरी रही। साल 1993 में नेल्सन मंडेला जब भारत के दौरे पर पहुंचे तब उन्होंने शबाना को गाल पर किस किया था। उस दौरान यह खबर काफी सुर्खियों में रही थी।
शबाना आजमी ने फिल्म ‘आई डोंट लव यू‘ में एक गाने को लेकर आपत्ति जताई थी और सोशल मीडिया पर फिल्म के निर्माताओं के साथ भिड़ गई थीं। वह गाना था ‘इश्क की मां की‘। इतना ही नहीं शबाना आजमी ने अपने बेटे फरहान अख्तर की फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग‘ में उनके एक्टिंग को लेकर नसरुद्दीन शाह द्वारा निंदा किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई थी।
शबाना आजमी ने अपने करियर में 100 से अधिक फिल्मों में काम किया है। इस दौरान उन्हें पांच बार राष्ट्रीय पुरस्कार और चार बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। बेहद कम लोग ही जानते हैं कि बॉलीवुड अभिनेत्री तब्बू और फराह नाज उनकी भतीजी हैं।
प्रयोगात्मक सिनेमा में शबाना आजमी का योगदान उल्लेखनीय है। शबाना किसी भी किरदार को करने में कोई हिचकिचाहट नहीं रखती हैं। बाल फिल्म मकड़ी में वह एक चुड़ैल की भूमिका में नजर आई हैं। फिल्म ‘गॉड मदर’ में शबाना का एक महिला डॉन के तौर पर निभाया गया किरदार लोगों को काफी पसंद आया था।
सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने कई सारे झुग्गी निवासियों, विस्थापित कश्मीरी पंडितों और महाराष्ट्र में लातूर भूकंप पीड़ितों की काफी मदद की है। 1989 में उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द के लिए नई दिल्ली से मेरठ तक चार दिनों की लंबी यात्रा की थी। शबाना आजमी बेहतरीन अभिनेत्रियों की सूची में शामिल है।
यॉर्कशायर स्थित लीड्स मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के चांसलर ब्रैंडन फोस्टर के द्वारा उन्हें कला में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है।
उनके प्रसिद्ध फिल्मों की बात करें तो इस सूची में अंकुर, अमर अकबर अन्थोनी, निशांत, शतरंज के खिलाडी, खेल खिलाडी का, हीरा और पत्थर, परवरिश, किसा कुर्सी का, कर्म, आधा दिन आधी रात, स्वामी, देवता, जालिम, अतिथि ,स्वर्ग-नरक, थोड़ी बेवफाई स्पर्श अमरदीप, बगुला-भगत, अर्थ, एक ही भूल हम पांच, अपने पराये, मासूम, लोग क्या कहेंगे, दूसरी दुल्हन गंगवा, कल्पवृक्ष, पार, कामयाब, द ब्यूटीफुल नाइट, मैं आजाद हूँ, इतिहास, मटरू की बिजली का मंडोला जैसी फिल्में शामिल है।