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परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा, जानिए क्या है पूरा मामला (Pervez Musharraf Death Penalty)

Pervez Musharraf Death Penalty: पाकिस्तान (Pakistan) के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) को देशद्रोह मामले में मौत की सज़ा मंगलवार को सुनाई गई है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2013 से लंबित इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने इस सज़ा का ऐलान किया था। आपको बता दें कि नवंबर, 2007 में देश में आपातकाल लागू कर देने के लिए पाकिस्तान के पूर्व सेनाप्रमुख रहे जनरल परवेज मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने शुरू किया था। 2013 तक ये मामला लटका रहा था, 2013 में जाकर मुशर्रफ पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। इससे पहले लाहौर स्थित एक विशेष अदालत ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को राजद्रोह के इस केस में 5 दिसंबर तक बयान दर्ज कराने का आदेश दिया था। वहीं दुबई में बसे हुए मुशर्रफ ने विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी थी, और उनकी गैरमौजूदगी में सुनवाई को स्थगित कर दिए जाने की अपील की थी। परवेज मुशर्रफ ने लाहौर हाईकोर्ट से आग्रह किया था कि विशेष अदालत के सुरक्षित रखे गए फैसले को तब तक के लिए निलंबित कर दिया जाए, जब तक कोर्ट में पेश होने के लिए उनकी तबीयत में सुधार ना हो जाए। लेकिन कोर्ट ने अब सज़ा का ऐलान कर दिया है।

क्या था पूरा मामला ?

मामला 2007 का है। जब तीन नवंबर, 2007 को परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान में आपातकाल लागू करते हुए 1973 के संविधान को निलंबित कर दिया था। ऐसा करने के बाद मुशर्रफ पूरी तरह राजनीति में चले गए और जनरल अशफाक कियानी को आर्मी की कमान सौंप दी। और खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली। दिसंबर 2007 में जाकर मुशर्रफ ने आपातकाल हटाया था और आपातकाल के 42 दिनों के दौरान लिए गए फैसलों को संवैधानिक करार दिया था। 2013 तक ये मामला लटका रहा लेकिन दिसंबर 2013 में उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद 31 मार्च 2014 को मुशर्रफ आरोपी करार दिए गए। वहीं इसी साल यानि 2014 के सितंबर में सभी सबूत विशेष अदालत के सामने रखे गए। हालांकि तमाम याचिकाओं के कारण ये मुद्दा लटका रहा। जिसके बाद मार्च 2016 में मुशर्रफ पाकिस्तान से बाहर चले गए। हाल ही में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने दुबई में रह रहे मुशर्रफ और पाकिस्तान सरकार की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विशेष अदालत को 28 नवंबर को फैसला सुनाने से रोक दिया था। और फैसला सुनाने की तारीख 17 दिसंबर मुकर्रर कर दी गई थी। जिसके बाद आज फांसी की सज़ा का ऐलान कर दिया गया है।

5 दिसंबर तक दर्ज कराने थे बयान

वहीं 28 नवंबर को फैसला सुनाने पर रोक के साथ साथ ये भी कहा गया था कि 17 दिसंबर को फैसला सुनाने से पहले 5 दिसंबर को बयान दर्ज किए जाएंगे। लेकिन मुशर्रफ ने हाल ही में संदेश जारी करते हुए कहा था कि वह काफी बीमार हैं और देश आकर बयान नहीं दर्ज कर सकते। साथ ही उन्होने अपने ऊपर लगे देशद्रोह के आरोपों को सिरे से खारिज भी कर दिया था। 

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