Shani Dev Jayanti Kab Hai : ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भगवान शनि देव की उपासना को महत्वपूर्ण माना गया है। शनि देव ही इकलौते ऐसे भगवान जिनकी आराधना सभी भक्त श्रद्धा के अलावा भय से भी करते हैं। इसके पीछे का कारण यह भी है कि, शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। कहा जाता है कि, जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष होता है उनका जीवन बहुत अधिक कष्टदायी होता है।
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सभी भक्त शनिवार के दिन उपासना करते हैं और जो भी भक्त शनि जयंती के दिन भगवान शनि की आराधना करते हैं उनकी सभी मनोकामना पूरी होती है। इस साल शनि जयंती 27 मई के दिन मनाई जाएगी और शनि देव के भक्त अभी से तैयारियों में जुट गए हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र शनि का जन्म ज्येष्ठ महीने की अमावस्या के दिन हुआ था। ऐसे में ज्येष्ठ महीने में भगवान शनि की पूजा अचूक मानी जाती है। भगवान शनि को न्याय का देवता माना जाता है जो कर्मों के आधार पर व्यक्ति को फल देते हैं।
ऐसी मान्यता है कि, जिस भी इंसान के ऊपर भगवान शनि की कृपा रहती है उसका भाग्य महज चंद ही समय के अंदर बदल जाता है। इसी वजह से सभी भक्त शनि देव को प्रसन्न करने के लिए ज्येष्ठ के महीने में विधि विधान के साथ पूजा करते हैं।
शनि जयंती के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान के पहले पूरे शरीर में तेल की मालिश कर स्नान करें। स्नान के उपरांत साफ कपड़े पहनकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान चालीसा के पाठ से शनि देव प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से जीवन से अशुभता दूर होती है और सभी बिगड़े हुए काम बनते हैं।
ज्येष्ठ के महीने में जरूरतमंद लोगों की अपनी क्षमता के अनुसार मदद करें। इस पूरे महीने भोजन, पानी, अन्न, वस्त्र और चप्पलों का दान करें। ज्योतिष शास्त्र में भी कहा गया है कि, जो भी इंसान अपने से कमजोर लोगों, विकलांगों और मजदूरों की सहायता करता है उसके सभी बिगड़े हुए काम जल्द ही बनते हैं।
ज्येष्ठ के महीने में उन चीजों का दान करें जो भगवान शनि को प्रिय हों। जानकारी के अनुसार, जरूरतमंद लोगों को काली उड़द, काले वस्त्र, काले तिल, छाता आदि का दान करना चाहिए। ऐसा करने से साढ़ेसाती की असाध्य पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है, इसके अलावा एक कटोरी में सरसों का तेल डालकर अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को शनि मंदिर में दान करें।
ज्येष्ठ के महीने में काले कुत्ते, कौए और सभी प्रकार के पशु-पक्षियों की सेवा करनी चाहिए और उनके भोजन की व्यवस्था भी करनी चाहिए। इसके साथ ही पीपल के पेड़ की पूजा करने से भी शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।
नोट – इस लेख में दी गई सभी जानकारियाँ धार्मिक और सामाजिक आस्था पर आधारित हैं। हम किसी भी प्रकार उपाय की पुष्टि नहीं करते हैं।
नवजात शिशु की त्वचा (baby skin) को छूने का अहसास दुनिया का सबसे सुखद अनुभव…
एक नए माता-पिता के तौर पर, बच्चे के रोने की आवाज़ से ज़्यादा परेशान करने…
घर में एक नन्हे मेहमान का आना दुनिया की सबसे बड़ी खुशियों में से एक…
हिसार, हरियाणा – हरियाणा के हिसार जिले के भाटोल जाटान गांव की कीर्ति बामल, जो…
मध्य प्रदेश, जिसे हम गर्व से Heart of Incredible India कहते हैं, अब सिर्फ घूमने…
अगर आप भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग सेवा IRCTC का इस्तेमाल करते हैं, तो…