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Roopkund Skeletons: समुद्रतल से 16,499 फीट की ऊंचाई पर उत्तराखंड के हिमालयन क्षेत्र में स्थित रूपकुंड नामक झील अपने पानी की वजह से नहीं बल्कि किसी और वजह से प्रसिद्ध है। इस झील में मछलियां कम नर कंकाल ज्यादा पाए जाते हैं। इसे कंकालों वाली झील भी कहा जाता है। क्योंकि इस झील के आस पास कई कंकाल बिखरे हुए हैं।
इस झील को लेकर कहानियां कई हैं। कोई कहता है कि इस झील में के आस-पास बिखरे प्राचीन नर कंकाल किसी राजा की सेना के जवानों के हैं। तो किसी का कहना है कि ये नर कंकाल सिंकदर के दौर के हैं। लेकिन इसके पीछे का सच अभी भी एक रहस्य बना हुआ है।
कहने वाले ये भी कहते हैं कि ये सभी कंकाल किसी महामारी के शिकार लोग थे। कुछ लोग कहते हैं कि ये आर्मी के लोग थे जो बर्फ के तूफ़ान में फंस गए। इंडिया टुडे में छपी एक खबर के मुताबिक, लोगों का मानना था कि ये अस्थियां कश्मीर के जनरल जोरावर सिंह और उनके साथियों की थीं। वे 1841 में तिब्बत युद्ध से लौट रहे थे। उसी साल पहली बार एक ब्रिटिश गार्ड को ये कंकाल दिखे।
पहले माना जाता रहा था कि ये कंकालों का समूह एक परिवार का था। दूसरा कुछ बौने लोगों का था। लेकिन अब पता चला कि ये कंकाल भारत, ग्रीस और साउथ ईस्ट एशिया के लोगों के थे। ये कैसे पता चला इस बात का भी जवाब है। एक स्टडी के दौरान, इन कंकालों के ऊपर रिसर्च की गई थी जिसकी रिपोर्ट अब छपी है। इस स्टडी में पता चला कि आखिर इन कंकालों का इतिहास क्या है।
नेशनल ज्योग्राफिक के शोधार्थी भी 30 से ज्यादा नर-कंकालों के नमूने इसी साल इंग्लैंड ले गए। वैज्ञानिकों की टीम अब भी इन कंकालों के शोध में लगी हुई है। अभी रिसर्च में कई और नई बातें सामने आना बाकी है। बावजूद इसके रूपकुंड झील का रहस्य अब भी बरकरार है।
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