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अब आप भी देख सकेंगे टाइटैनिक का मलबा, लेकिन चुकानी होगी एक मोटी रकम

टाइटैनिक दुनिया का सबसे बड़ा, खूबसरत और कभी ना डूब सकने वाला जहाज था। लेकिन कुदरत को यह मंजूर ना था, जिस कारण 14-15 अप्रैल, 1912 की रात को टाइटैनिक(Titanic), बर्फ के एक पहाड़ से जा टकराकर और उत्तरी अटलांटिक सागर में डूब गया।

दुनिया का सबसे बड़ा और खूबसूरत जहाज टाइटैनिक(Titanic) जो कभी ना डूब सकने के लिए फेमस था। अपनी पहली यात्रा के दौरान ही एक हिमखंड से टकराकर उत्तरी अटलांटिक सागर में डूब गया। इसके मलबे की खोज लगभग 73 सालों तक चली और आखिरकार 1985 में पूरी तरह से जंग खाया हुआ इसका मलबा ढूंढ निकाला गया।

टाइटैनिक(Titanic) के मलबे को देखने में कितना होगा खर्चा

Image Source – Aajtak

समय-समय पर इस मलबे पर कई तरह के परीक्षण किए गए। लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने यह पाया कि अब टाइटैनिक(Titanic) का मलबा ज्यादा दिन का मेहमान नहीं है और आने वाले 20-30 सालों में यह पूरी तरह से समुन्द्र के पानी में विलुप्त हो जाएगा। इसलिए पानी के नीचे की दुनिया की खोज करने वाली एक कंपनी ने, ‘टाईटैनिक सर्वे एक्सपीडिशन 2021’ प्रोजेक्ट की घोषणा की है, जिसमें टाइटैनिक के चाहने वालों को इसके मलबे की सैर कराई जाएगी। इसके लिए आपको समुद्र की सतह से लगभग 12,467 फीट नीचे की यात्रा करनी होगी, जिसका खर्च लगभग 93 लाख रुपए होगा।

क्या कहती है फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट-

Image Source – Aajtak

फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ओशनगेट एक्सपीडिशन, समुन्द्र की गहराई में टाइटैनिक के मलबे की खोज और रिसर्च के लिए ‘नागरिक विशेषज्ञों’ को ‘मिशन विशेषज्ञ’ के रूप में ट्रेनिंग देगा। इसके बाद मिशन के विशेषज्ञ, जिन्हें विशेषज्ञता में शामिल होने के लिए स्वीकार किया जाएगा, वे नागरिक वैज्ञानिकों और खोजकर्ताओं को, मलबे वाली जगह पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पहले शेड्यूल का उद्घाटन जुलाई के मध्य से मई के अंत तक होगा और इसके लिए छह मिशन निर्धारित लिए जाएंगे। प्रत्येक मिशन 10 दिन तक चलेगा और इसमें 5 पनडुब्बी में गोताखोर शामिल किए जाएंगे, जो नागरिक वैज्ञानिकों और खोजकर्ताओं को मलबे की साइट तक लेकर जाएंगे। ओशनगेट के अनुसार, सिरीज का एक और सेट 2022 की गर्मियों के समय चलेगा।

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फॉक्स न्यूज के अनुसार, प्रत्येक मिशन पर जाने के लिए 9 योग्य वैज्ञानिकों को मंजूरी दी जाएगी और पांच व्यक्तियों पर केवल तीन “मिशन विशेषज्ञ” की अनुमति दी जाएगी।

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