धर्म

करवा माता की ऐसे करें पूजा, सारी मनोकामना होंगी पूरी

Karwa Chauth Vrat Katha 2022: सुहागन महिलाओं के लिए करवा चौथ का त्यौहार उनके जीवन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। करवा चौथ का त्यौहार उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा होता है और इस दिन सुहागन महिलाएं पूरे मन से अपने पति के लिए व्रत उपवास रखती हैं। अक्टूबर का महीना शुरू होने वाला है और इस महीने त्योहारों की झड़ी लगती है। अक्टूबर के महीने में दशहरा, दीपावली, छठ पूजा और करवा चौथ जैसे खास त्यौहार शामिल हैं त्योहारों के हिसाब से अक्टूबर का महीना बेहद खास है।

सुहागन महिलाओं के जीवन में अधिक महत्वपूर्ण है यह त्यौहार

करवा चौथ का त्यौहार साल के अक्टूबर महीने में आता है। इस साल करवा चौथ का त्यौहार 13 अक्टूबर 2022 को मनाया जाएगा। इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए सुबह से रात चांद निकलने तक अन्न का त्याग करती हैं और चांद देखने के बाद अपने पति का चेहरा देखने के बाद ही व्रत तोड़ती हैं। यह त्योहार सुहागन महिलाओं के जीवन में सबसे खास त्यौहार होता है। इस महत्वपूर्ण पर्व पर सुहागन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और उसकी खुशी के लिए करवा माता की पूजा(Karwa Chauth Puja)करती हैं और जो महिलाएं पूरे मन से यह पूजा संपन्न करती हैं उनके पति की दीर्घायु लंबी होती है और उनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।

कैसे शुरू हुई करवा चौथ की परंपरा

शास्त्रों के अनुसार, करवा चौथ का त्यौहार कैसे और कब से मनाया जाने लगा? शास्त्रों में लिखा है कि एक बार देवताओं और दानव में युद्ध होने लगा और दानव देवताओं पर भारी पड़ने लगे। इस तरह से देवताओं पर संकट आ पड़ा जिसकी वजह से देवताओं की पत्नियां विचलित होने लगी और ब्रह्मदेव से उनकी रक्षा के लिए प्रार्थना करने लगी। देवताओं की रक्षा के लिए उनकी पत्नियां ब्रह्मदेव के पास गईं तो ब्रह्म देव ने उनको उपाय बताया कि अगर आप अगर तुम सब अपने पति की रक्षा चाहती हो तो तुम्हें करवा चौथ का व्रत(Karwa Chauth Vrat) रखना पड़ेगा और इस व्रत के प्रभाव से आपके पतियों पर कोई संकट नहीं आएगा जो भी संकट आया है वह चला जाएगा। इस तरह से कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाने लगा।

करवा चौथ का त्यौहार महाभारत कथा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है क्योंकि जब पांडव पर कौरव ने संकट की बाधाएं डालने की कोशिश की थी तब द्रौपदी ने अपने पतियों के लिए करवा चौथ का व्रत धारण किया था। श्री कृष्ण ने द्रौपदी को करवा चौथ व्रतKarwa Chauth Vrat) रखने के लिए कहा और द्रौपदी ने यह व्रत रखा जिसके प्रभाव से पांडवों की रक्षा हुई और वह युद्ध में विजई हुए।

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