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ताजमहल के वे रहस्य, जो अब तक हैं आपकी नजरों से दूर

प्रेम का खूबसूरत निशां – ताजमहल

प्रेम जब सीमाओं से आगे चला जाता है तो खुदा की बंदगी हो जाता है। ऐसे में अगर इस प्रेम को अजूबा कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। ऐसा ही दुनिया का एक अजूबा है आगरा का ताजमहल। ताजमहल, प्रेम का वह प्रतीक है जिसकी मिसाल विश्व भर के प्रेमी एक दूसरे के प्रेम में देते रहे हैं। मुहावरे, वाक्य और फिल्मों के डायलॉग तक इस पर लिखे जा चुके हैं। इस इमारत की खूबसूरती को कला के बेजोड़ संगम की उपमा दी जाती है। ताज की तारीफ़ में कवियों और लेखकों ने बहुत कुछ कहा है। इसे देखने के लिए विश्व भर से पर्यटकों का ताँता लगा रहता है। राजा महाराजाओं ने अपनी पत्नियों, प्रेमिकाओं और रानियों को तोहफे तो बहुत दिए होंगे पर जो जादू इस कारीगरी में है वो और कहीं देखने को नहीं मिलता।

चलिए, बात करते हैं ताजमहल के इतिहास की(History Of Taj Mahal In Hindi)। इसका इतिहास मात्र एक दस्तावेज़ बल्कि एक ऐसी दास्ताँ है जिसे जानने के लिए देश और विदेश के पर्यटक खासतौर से गाइड को साथ लेकर चलते हैं और एक कहानी की तरह सुनना पसंद करते हैं।

Image Source: hindi.holidayrider.com

प्रेम प्रतीक ताजमहल का इतिहास(History Of Taj Mahal In Hindi)

उत्तर प्रदेश का आगरा जिला इसी बेजोड़ कलात्मक इमारत की वजह से न केवल ऐतिहासिक महत्वता रखता है बल्कि विश्व के मानचित्र पर एक सितारे की तरह चमक रहा है। दूध जैसे संगमरमर से बना, यमुना नदी के किनारे बना ताज, मुमताज महल की याद में मुग़ल सम्राट शाहजहां द्वारा बनवाये गया कला की बेजोड़ मिसाल है। अपनी तीसरी और सबसे प्रिय पत्नी की मृत्यु के बाद शाहजहां बहुत दुखी था। इसी दौरान 1631 ई. में उसने अपनी पत्नी की शानदार कब्र बनाने का फैसला किया और ताजमहल का निर्माण करवाया। अपने 14वें बच्चे को जन्म देते वक्त मुमताज़ महल की मृत्यु हो गयी थी। इस मकबरे का निर्माण कार्य 1648 में पूरा किया गया था। शाहजहां की कब्र भी ताजमहल में स्थित है। 1983 में यूनेस्को द्वारा इसे विश्व विरासत के तौर पर चिन्हित किया गया। यूनेस्को ने इसे भारत में मुस्लिम वास्तुकला का बेजोड़ उदाहरण कहा है। ताजमहल महल को देखने लाखों पर्यटक हर साल देश विदेश से यहाँ पहुँचते हैं। आस पास का वातावरण और सुंदरता ताजमहल को अत्याधिक खूबसूरत बनाती है। कि शाहजहां मुमताज़ को याद करते हुए इस इमारत को हर रोज़ निहारता था. इस इमारत का निर्माण करने में बहुत धन, मेहनत – परिश्रम और समय लगा था।  

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देश और विदेश के लेखकों ने ताज की वास्तुकला के बारे में और इसके ऐतिहासिक महत्व पर बहुत कुछ लिखा है और शायद लिखते रहेंगें। प्रेम के इस प्रतीक को जितना सराहा जाये उतना कम है। 

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Shailja Kaushal

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