ज़रा हटके

नोएडा में सामने आई अस्पताल प्रशासन की लापरवाही, कूल्हे की जगह डॉक्टर ने किया दिल का ऑपरेशन।

Patient Died Due To Negligence In Treatment: नोएडा के फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर्स के ऊपर बड़ी लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। यहाँ पर राजस्थान से इलाज कराने आये मरीज को कूल्हे में समस्या थी, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने कूल्हे की बजाय दिल का ऑपरेशन कर दिया। इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु हो गयी और अब अस्पताल प्रशासन के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये को देखते हुए मृतक के परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया है। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले को लेकर अपनी सफाई दी है।

जानिए क्या है पूरा मामला

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, जयपुर के रहने वाले दिनेश कुमार सक्सेना (66 वर्ष) को गिरने की वजह से कूल्हे में गंभीर चोटें आई थी। इसी चोट की वजह से मरीज के परिजन दिनेश कुमार को लेकर नोएडा स्थित फोर्टिस अस्पताल उपचार के लिए लाए थे। दिनेश कुमार को शनिवार के दिन फोर्टिस अस्पताल में भर्ती किया गया था और मंगलवार के दिन मरीज की एंजिओग्राफी की गयी थी। मृतक के बेटे शुभम सक्सेना ने बताया की उनके पिता की दो बार पहले भी एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी और बुधवार की सुबह तक उनकी हालत में सुधार था। शुभम का आरोप है की डॉक्टर्स के द्वारा उन्हें किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गयी थी और शाम को जब वह आईसीयू में पिता को देखने पहुंचे तो उनके पिता अचेत अवस्था में पड़े थे। शक उत्पन्न होने के बाद जब डॉक्टर्स से पूँछा गया तो उन्होंने बताया कि उनकी मृत्यु शाम के समय हो गयी है। मौत की खबर सुनते ही शुभम सक्सेना ने पुलिस को बुलाया और अस्पताल प्रशासन पर कड़ी कार्यवाई करने की गुहार लगाई है।

अस्पताल प्रशासन ने दी अपनी सफ़ाई

वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल प्रशासन ने अपनी सफ़ाई दी है और कहा कि मरीज को पहले से ही दिल की गंभीर बिमारी थी। कूल्हे की सर्जरी के पहले मरीज की स्थिति को सुधारना जरुरी था। वहीं मरीज के परिजनों को मरीज की सेहत से जुड़ी हुई हर एक अपडेट दी जा रही थी और मृतक के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती गयी है। परिजनों के द्वारा लगाए सभी आरोपों को अस्पताल प्रशासन ने निराधार बताया है

*हमने इस पूरी घटना की जानकारी अमर उजाला की खबर के माध्यम से जुटाई है।*

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Adarsh Tiwari

सॉफ्टवेयर की पढ़ाई करते करते दिमाग हैंग सा होने लगा तो कहानियां पढ़ने लगा. फिर लिखने का मन किया तो लिखना शुरू कर दिया। अब आप पढ़कर बताइए की कैसा लिख रहा हूँ.

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