पहले इश्क, फिर इश्क में नाकामयाबी और फिर उस दर्द से टूटे इंसान की बर्बादी। इस तरह की फिल्में पहले भी बॉलीवुड में फिल्माई गई हैं लेकिन उनका अंदाज़ अलग था। ऐसे में कबीर सिंह (Kabir Singh) उन सबसे कुछ अलग नज़र आती है और काफी दमदार भी। एक ऐसा इंसान जो काफी गुस्सैल, अड़ियल और झगड़ालू है उसे बेपनाह प्यार हो जाता है…लेकिन उसका यही रवैया उसके प्यार को उससे जुदा करता है और फिर शुरू हो जाता है उसकी बर्बादी का दौर। अगर आप ये पागलपन से भरी लव स्टोरी देखने का प्लान कर रहे हैं

तो पहले जान लें मूवी रिव्यू (Kabir Singh Movie Review)

कहानी 

इस फिल्म की पूरी कहानी कबीर सिंह(शाहिद कपूर) नाम के शख्स के इर्द गिर्द ही घूमती है जो नशे का आदी है, गुस्सैल है और गुस्से में किसी भी हद तक जा सकता है। लेकिन इससे इतर वो एक होनहार सर्जन है तो साथ ही फुटबॉल का चैंपियन भी। लेकिन कबीर के गुस्से और गलत व्यवहार के चलते ही उसे कॉलेज से सस्पेंड कर दिया जाता है। तभी कॉलेज में प्रीति सिक्का (कियारा अडवानी) एडमिशन लेती है जो सिंपल, खूबसूरत और शांत स्वभाव की लड़की है। इसकी सादगी कबीर सिंह को भा जाती है और वो दीवानों की तरह प्रीति को चाहने लगता है। यहां तक की प्रीति के पास आने वाले लड़कों से मारपीट भी करता है। लेकिन कबीर के गुस्से और परिवार के दवाब के चलते प्रीति किसी और से शादी कर लेती है। जिसके बाद कबीर सिंह पूरी तरह से शराब और ड्रग्स के नशे में डूब जाता है और फिर शुरू होती है उसकी बर्बादी की दास्तां। आखिर में क्या होता है ये बताकर हम आपका सस्पेंस खराब नहीं करेंगे। ये देखने के लिए आप थियेटर का रूख करें।

रिव्यू (Kabir Singh Movie Review)

अब बारी आती है फिल्म के रिव्यू (Movie Review) की। ‘कबीर सिंह’ सुपरहिट तेलुगू फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’(Arjun Reddy) की रीमेक है लिहाज़ा दोनों फिल्मों की तुलना होना लाज़िमी है और कबीर सिंह उस कसौटी पर खरी भी उतरती है। फिल्म का सब्जेक्ट जिस पागलपन की मांग करता है उस पर शाहिद कपूर पूरी तरह से सटीक बैठते हैं। पूरी तरह से बर्बाद आशिक के रोल में शाहिद कपूर परफेक्ट रहे हैं। वही कियारा आडवाणी ने भी सिंपल लड़की का किरदार बखूबी निभाया है लेकिन फिल्म की यूएसपी रहे हैं शाहिद कपूर(Shahid Kapoor)। वही इस फिल्म का म्यूज़िक भी काफी शानदार है जो दर्शकों के दिलों के छूता है। लेकिन फिल्न के नेगेटिव प्वाइंट्स की बात करें तो फिल्म लंबी प्रतीत होती है जिससे बोरियत भी होने लगती है। अगर फिल्म को थोड़ा छोटा कर दिया जाता तो ये और बेहतर हो सकती थी।

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