बाहुबली फेम प्रभास….जिनकी दमदार एक्टिंग, डायलॉग डिलीवरी टाइमिंग व अलग अंदाज़ के सब कायल है तभी लोगों को साहो (Saaho) से इतनी उम्मीदें थीं लेकिन लगता है साहो उन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। प्रभास और श्रद्धा कपूर स्टाटर इस बिग बजट मूवी का इंतज़ार लोगों को लंबे समय से था और अब जब इंतज़ार की घड़ियां खत्म हुई तो लोगों में थोड़ी निराशा नज़र आ रही है। साहो को बॉलीवुड की सबसे महंगी फिल्म होने का खिताब मिल चुका है, ये फिल्म 350 करोड़ रूपए की लागत से बनी है…इस फिल्म के ज़ोरदार एक्शन सीन्स की झलक ट्रेलर में ही मिल गई थी। वहीं अगर आप साहो देखने का प्लान बना रहे हैं तो पहले ज़रा साहो मूवी रिव्यू (Saaho Movie Review) पर नज़र ज़रूर डाल लें।

कहानी
साहो की कहानी मुंबई में एक बड़ी डकैती से शुरू होती है। पूरी फिल्म में एक ब्लैक बॉक्स की तलाश में हर कोई जुटा नज़र आता है। फिल्म में एक हीरो है लेकिन विलेन ढेर सारे हैं….फिल्म में प्रभास पुलिस की भूमिका में हैं जो विलेन्स को हराने व मारने में लगा रहता है…फिल्न इसी प्लॉट पर बेस्ड है। अब आपको मूवी रिव्यू बताते हैं।

saaho

साहो रिव्यू (Saaho Movie Review)

स्टोरी पढ़कर ही हमें अंदाज़ा हो जाता है कि वहीं पुराने घिसे-पिटे स्टोरी ट्रैक को नए कलेवर में, नए चेहरों के साथ निर्देशक ने हमारे सामने पेश कर दिया है। स्टोरी में कलाकारों के चेहरों के अलावा कुछ भी नया नहीं है। ऐसी कहानियों पर बॉलीवुड में फिल्मों की भरमार है। फिल्म की यूएसपी इसका दमदार और हैरान कर देने वाला एक्शन बताया गया था और इसी पर फिल्म के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा खर्च हुआ है। फिल्म का एक्शन और वीएफएक्स अच्छा तो है, आपको पसंद भी आएगा लेकिन कई जगहों पर एक्शन सीन बेवजह ठूसे हुए नज़र आते हैं।  किरदारों की बात करें तो प्रभास बाहुबली वाली छाप छोड़ने में कामयाब नहीं नज़र आते तो वहीं श्रद्धा कपूर का किरदार बेहद वीक है….क्राइम ब्रांच के कॉप के भूमिका में श्रद्धा दूसरों की मदद करती है लेकिन हर बार मुश्किल में फंसी श्रद्धा को प्रभास ही बचाते हैं…ये बात थोड़ी अटपटी लगती है। डायलॉग डिलीवरी की बात करें तो प्रभास की टाइमिंग बेहद स्लो है ..हिंदी डबिंग में वो थोड़े स्लो लगते है जिससे दर्शको के दिलों में डायलॉग उतर नहीं पाते। और इरीटेटिंग लगते हैं । फिल्म का म्यूज़िक व गाने तो अच्छे है लेकिन कहानी जिस हिसाब से चल रही है उस हिसाब से सही जगह पर गाने फिट नहीं बैठते। जिससे फिल्म लंबी व बोरिंग लगती है। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा इंट्रस्टिंग है लेकिन सेकेंड हाफ बोरिंग लगता है।

साहो क्यों देखें – कुल मिलाकर साहो एवरेज मूवी है…अगर प्रभास के डाई हार्ट फैन हैं….वीकेंड पर कोई और प्लान नहीं है तो साहो देख सकते हैं।

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