Rajendra Singh Dhami: दुनिया भर में कोरोना के चलते सभी देशों की आर्थिक स्थिती पर बड़ा असर पड़ा है। मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले बहुत लोगों की जहां नौकरियां हाथ से चलीं गईं तो वहीं बड़ी तादात में लोग बेरोज़गार हो गए। एक ऐसे ही शख्स हैं जिनकी जिंदगी की गाड़ी पटरी से उतर गई है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। कभी भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान रहे राजेंद्र सिंह धामी आज मजदूरी करके अपने जीवन का गुज़ारा करने को मजबूर हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़(Pithoragarh) में रहने वाले राजेंद्र पहले व्हीलचेयर क्रिकेट टीम का नेतृत्व कर चुके हैं , लेकिन इस वक्त वह मनरेगा (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) के तहत मज़दूरी कर के अपना पेट पाल रहे हैं।

लकवे से हैं पीड़ित

Rajendra Singh Dhami Working as a Labourer
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राजेंद्र सिंह धामी(Rajendra Singh Dhami) का 90 प्रतिशत शरीर लकवे की चपेट में आ चुका है जिसकी वजह से उनके शरीर के अधिकतर अंग काम नहीं करते। पहले वह व्हीलचेयर टूर्नामेंट्स से कुछ कमाई कर अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन कोरोना(Corona) महामारी के कारण उनसे यह भी छीन गया और वह मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। एनडीटीवी पर छपी खबर के मुताबिक उन्होंने बताया, ‘एक टूर्नामेंट होना तय था लेकिन कोविड-19 के चलते उसे टाल दिया गया। मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वो मुझे मेरी योग्यता के हिसाब से नौकरी दिलवाएं।’

Rajendra Singh Dhami Caption of wheelchair cricket team
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वहीं पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगडंडे ने जानकारी देते हुए कहा कि अथॉरिटीज़ ने जिले के स्पोर्ट्स ऑफिसर को धामी की तुरंत आर्थिक मदद करने को कहा है। उन्होंने कहा, ‘फिलहाल, उनकी आर्थिक स्थिति खराब लग रही है। हमने जिले के स्पोर्ट्स अधिकारी से उनकी तुरंत मदद के लिए पैसे देने को कहा है। उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना या फिर ऐसी ही दूसरी योजनाओं के तहत लाभ दिया जाएगा, ताकि उन्हें भविष्य में जीवनयापन में मदद मिल सके।’

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