Ashok Chakra 26 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के हांथों से अशोक चक्र स्वर्गीय लांस नायक नजीर अहमद वानी के परिवार को दिया। अशोक चक्र शांति काल के दौरान प्रदान किया जाने वाला भारत का सर्वोच्च वीरता सम्मान है। 38 वर्षीय  नजीर अहमद वानी कुलगाम के अश्मुजी के रहने वाले थे। वह 25 नवंबर को भीषण मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे।

6 आतंकियों को ढेर करने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को अशोक चक्र

आतंकी रहे  नजीर अहमद वानी बाद में हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौट आए थे। वह 2004 में सेना में शामिल हुए थे। दक्षिण कश्मीर में कई आतंकवाद रोधी अभियानों में शामिल रहे। अशोक चक्र भारत का शांति के समय दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। वानी को आतंकवादियों से लड़ने में अदम्य साहस का परिचय देने के लिए सेना पदक भी दिया गया।

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जिस एनकाउंटर में वानी शहीद हुए थे, उसमें सुरक्षाबलों ने छह आतंकियों को मार गिराया था। आतंक छोड़कर आत्मसमर्पण करके भारतीय सेना को ज्वाइन करने वाले वानी को साल 2007 में वीरता के लिए सेना का मेडल भी दिया जा चुका है। वानी कुलगाम तहसील के चेकी अश्‍मूजी गांव के रहने वाले थे। लांस नायक नजीर अहमद वानी के परिवार में उनकी पत्‍नी और दो बच्‍चे हैं।

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विश्लेषण।

उन्‍होंने करियर की शुरुआत वर्ष 2004 में टेरिटोरियल आर्मी से की थी। उन्‍हें सुपुर्द-ए-खाक के वक्त 21 तोपों की सलामी दी गई थी। बता दें, दक्षिण कश्‍मीर में स्थित कुलगाम जिला आतंकवादियों का गढ़ माना जाता है।

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