South Korean Female Doctor: चीन में जब कोरोना वायरस ने अपने पांव पसार लिए तो इसके बाद दक्षिण कोरिया में भी इसका फैलना शुरू हुआ। पहला पॉजिटिव केस यहां 4 फरवरी को सामने आया था, जिसके बाद केवल 10 दिनों के अंदर यहां संक्रमित मरीजों की संख्या 3 गुना हो गई थी। इसके बाद तो इस कदर यहां मामले बढ़ने लगे कि ऐसा लगने लगा कि चीन के बाद अब दक्षिण कोरिया को ही कोरोना वायरस का संक्रमण एकदम तबाह करने वाला है। ऐसे में यहां डॉ जेऑन्‍ग कियोंग सामने आईं जो कि फैमिली डॉक्टर के तौर पर काम कर चुकी थीं। उन्होंने दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कुछ इस तरह की रणनीति तैयार की कि बहुत जल्द इसका असर दिखने लगा और आज स्थिति यह है कि यहां बहुत ही कम संख्या में अब कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। साथ ही मरीज ठीक होकर अपने घर लौट रहे हैं।

कैसे पाया काबू?

बीते 50 दिनों में दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस के संक्रमण के 9037 मामले प्रकाश में आए हैं। इनमें से 120 मरीजों की जान चली गई है। वहीं, 3507 मरीज ऐसे हैं जो ठीक होकर अपने घर लौट गए हैं। दक्षिण कोरिया में इस वायरस के फैलने की शुरुआत एक धार्मिक आयोजन के दौरान हुई थी। डॉ जेऑन्‍ग कियोंग ने इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों की व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करवानी शुरू कर दी। काम आसान नहीं था, क्योंकि इसमें 2 लाख 12 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। इन्होंने सभी के मेडिकल टेस्ट का निर्देश दे दिया। 25 फरवरी के बाद से अब तक दक्षिण कोरिया में तीन लाख से भी अधिक लोगों का मेडिकल टेस्ट किया जा चुका है। डॉ जेऑन्‍ग के मुताबिक मेडिकल टेस्ट की वजह से ही दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस के संक्रमण पर अब धीरे-धीरे ब्रेक लगने लगा है।

युद्धस्तर पर बनाये टेस्टिंग किट

दक्षिण कोरिया में चार कंपनियां बीते 27 फरवरी तक टेस्टिंग किट तैयार करने का काम कर रही थीं। डॉ जेऑन्‍ग के निर्देश पर रोजाना 20 हजार लोगों का मेडिकल टेस्ट आज भी किया जा रहा है। छोटे-छोटे टेलीफोन बूथ के आकार के टेस्टिंग स्टेशन बना दिए गए हैं। डॉक्टरों की टीम इस पर नजर रख रही है। पहले तो फैमिली डॉक्टर के तौर पर डॉ जेऑन्‍ग काम कर रही थीं। उसके बाद 1995 में उन्हें नेशनल हेल्थ मिनिस्ट्री में जगह मिल गई।

वर्ष 2009 में जब स्वाइन फ्लू फैला था तो उस दौरान उन्हें पदोन्नति दी गई और इमरजेंसी केयर डिपार्टमेंट की जिम्मेवारी उन्हें सौंप दी गई थी। H1N1 वायरस से दक्षिण कोरिया में करीब 7.50 लाख लोग संक्रमित हुए थे। उस वक्त यहां इमरजेंसी केयर डिपार्टमेंट (CDC) की खूब आलोचना भी हुई थी। इसके बाद डॉ जेऑन्‍ग कियोंग को कोरियाई सेंटर्स फॉर डिजीज एंड पब्लिक कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (KCDC) का प्रमुख बना दिया गया।

काम आया अनुभव

CDC के पूर्व निदेशक के हवाले से बताया गया कि डॉ जेऑन्‍ग के पास लंबा अनुभव है। इस वक्त उनसे बेहतर काम कोई और नहीं कर सकता है। KCDC की पहली महिला निर्देशक बनने का उन्हें गौरव भी प्राप्त हुआ है। राष्ट्रपति मून जे ने उन्हें सीडीसी की जिम्मेवारी 2017 के जुलाई में सौंप दी। लॉकडाउन दक्षिण कोरिया ने बिल्कुल भी नहीं किया। यहां सभी ऑफिस खुले रहे थे। स्कूल भी अब अप्रैल में खुलने जा रहे हैं। सीडीसी की अभी भी यही कोशिश है कि अधिक-से-अधिक संख्या में टेस्टिंग की जाए।

दुनियाभर में 188 देश अब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। कुछ हफ्ते पहले तक दक्षिण कोरिया संक्रमण के मामले में चीन और इटली के बाद खड़ा था, लेकिन आज यहां स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है। मरने वालों की तादाद यहां केवल 0.7% ही रही है, जबकि इटली में यह 7.94 प्रतिशत और चीन में 3.98% रही है।

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