3L Formula: पूरी दुनिया में इस वक्त कोरोना वायरस की वजह से हाहाकार मचा हुआ है। अब तक दुनिया भर में 16 लाख से भी अधिक लोग कोरोना वायरस के संक्रमण का शिकार हो गए हैं। इसकी वजह से दुनियाभर में एक लाख से भी अधिक लोगों की मौत हो गई है। भारत में कोरोना वायरस से बचने के लिए 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा है। यह 14 अप्रैल को समाप्त जरूर हो रहा है, लेकिन इसका दो हफ्ते तक और बढ़ाया जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा की जानी अभी बाकी है।

WHO ने कहा (WHO suggested 3L Formula During Lockdown Extension)

इसी क्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से यह कहा गया है कि भारत अब दूसरे लॉकडाउन की तरफ बढ़ रहा है। दूसरे लॉकडाउन के दौरान भारत को न केवल बीमारी के प्रसारण को ध्यान में रखना पड़ेगा, बल्कि लोगों की आजीविका भी इस दौरान सुनिश्चित करनी पड़ेगी, ताकि उन्हें चोट कम पहुंचे। WHO के विशेष दूत डेविड नाबरो के हवाले से इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बताया गया है कि WHO करोना संक्रमण के खिलाफ जंग में भारत की ओर से उठाए गए कदमों का समर्थन करता है। उनके पास फिलहाल पर्याप्त आंकड़े मौजूद नहीं हैं, फिर भी वे मानते हैं कि लॉकडाउन के माध्यम से कोरोना के संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरीके से सभी संगठनों, राष्ट्रीय सरकारों और अन्य लोगों ने लॉकडाउन के दौरान भी लोगों की आजीविका सुनिश्चित करने की कोशिश की है और विशेष तौर पर खाद्य संकट से उन्हें बचाने का प्रयास किया है, वह सराहनीय है।

तीन L पर दें ध्यान (3L Formula)

भारत में लॉकडाउन 2.0 के बारे में उन्होंने कहा कि इस पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की एवं आंकड़ों को संकलित करने की अधिक जरूरत है। इस दौरान तीन L पर ध्यान रखना चाहिए। ये हैं लाइफ, लाइवलीहुड और लिविंग। जीवन आजीविका और जीने के तरीके पर उन्होंने कहा कि सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। नाबरो ने कहा कि जब तक वायरस को हम मिटा नहीं देते, तब तक भविष्य में भी इसका सामना करने के लिए हमें तैयार रहना पड़ेगा।

लॉकडाउन 2.0 हो अधिक धारदार

नाबरो ने यह भी कहा कि लॉकडाउन 2.0 को अधिक धारदार और प्रभावी बनाने की जरूरत होगी। बीते शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक किए जाने के बाद इस बात की उम्मीद बढ़ गई है कि 14 अप्रैल से आगे भी लॉकडाउन बढ़ने वाला है। सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अप्रभावित क्षेत्रों में इस दौरान कुछ छूट दी जा सकती है।

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