7 Chakras in Hindi: एक आदर्श जीवन जीने के लिए किसी भी व्यक्ति के लिए यह बहुत ही आवश्यक है कि वह अपने शरीर को स्फूर्तिवान बनाए और ऐसा योग के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है। वैसे तो विज्ञान ने काफी ज्यादा तरक्की कर ली है मगर योग शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे बेहतर विकल्प माना गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब मनुष्य चारों तरफ से सकारात्मक ऊर्जा से घिरा रहता है और वह अपने अनुकूल दिशाओं का पालन करता है, उस दौरान निरंतर खुश रहने के लिए उसके 7 चक्र योग्य दिशा और पूर्ण रूप से प्रभारित होते हैं। क्या हैं ये 7 चक्र और किस तरह से हमारे शरीर को प्रभावित करते हैं तथा इससे हमें क्या लाभ मिलता है। आज के इस पोस्ट में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने वाले हैं।

हमारे शरीर में 7 चक्र और उनका जीवन पर प्रभाव [7 Chakras in Hindi]

सबसे पहले तो आप यह जान लीजिये कि हमारे शरीर में कुल 114 चक्र उपस्थित हैं मगर मुख्य रूप से 7 चक्रों को ही प्रमुखता दी गई है, जिनके नाम हैं मूलाधार चक्र, सहस्रार चक्र, अजना चक्र, अनाहत चक्र, मणिपुर चक्र, विशुद्ध चक्र तथा स्वाधिष्ठान चक्र। किसी भी चक्र को जागृत करने से पहले जरूरी है ध्यान लगाना। यह काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है कि ध्यान लगाने के लिए आपको एक शांत वातावरण चाहिए होता है। इसमें शांत स्थान पर ध्यान की मुद्रा में बैठकर अपनी सांस पर ध्यान देना होता है। ऐसा करने से चक्रों को जागृत करने में सहायता मिलती है। हालांकि, आपको यह भी बता दें कि अगर आप इन सभी 7 चक्रों को जागृत कर चुके हैं, तो यह भी बहुत ही आवश्यक है कि इसे नियंत्रण में रखा जाए।

  1. स्वाधिष्ठान चक्र: बता दें कि स्वाधिष्ठान चक्र जननेंद्रिय के ठीक ऊपर होता है। इस चक्र का संबंध हमारे शरीर में स्थित जल तत्व से होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस चक्र के जागृत हो जाने पर शारीरिक समस्या और विकार, क्रूरता, आलस्य, अविश्वास जैसे तमाम तरह के दुर्गुणों का नाश होता है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि शरीर में किसी भी प्रकार का विकार जल तत्व के ठीक न होने से होता है।
  2. मूलाधार चक्र: यह चक्र गुदा और जननेंद्रिय के बीच स्थित होता है। योग शास्त्र के अनुसार बताया जाता है कि यदि हम इस स्थान पर ध्यान लगायें तो इससे वीरता और आनंद भाव की प्राप्ति होती है। यह भी बताया गया है कि यदि मूलाधार चक्र सक्रिय न हो तो इसकी वजह से व्यक्ति अक्सर ही कब्ज, दस्त, बवासीर, कोलाइटिस, उच्च रक्तचाप जैसे गंभीर समस्याओं से पीड़ित रहता है।
  3. मणिपुर चक्र: नाभि के ठीक ऊपर मौजूद मणिपुर चक्र की वजह से हमारे शरीर में ज्यादा ईर्ष्या, भय आदि जितनी भी चीजें हैं वह जागृत नहीं हो पाती है। बताया जाता है कि यदि योगिक क्रियाओं के जरिये उत्पन्न समस्त ऊर्जा को इस चक्र में इकट्ठा कर लिया जाए तो ऐसा करके आप कर्मयोगी बन सकते हैं।
  4. आज्ञा चक्र: यह चक्र हमारे शरीर के दोनों भौंहों के बीच स्थित होती है। बता दें कि इस चक्र को जागृत करने से अंतर्ज्ञान, कल्पना और स्थितियों से निपटने की क्षमता मिलती है। आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि इसके जागृत होने से इंसान को आत्म ज्ञान प्राप्त होता है।
  5. सहस्रार चक्र: इस चक्र के बारे में बताया गया है कि यह मस्तिष्क के मध्य भाग में स्थित होता है। माना जाता है कि इस चक्र का संबंध आंतरिक और बाहरी सौंदर्य तथा आध्यात्मिकता के साथ संबंध से है। हालांकि, इस चक्र को जागृत करने में तमाम तरह की परेशानियां आती हैं मगर इसके जागृत होने के पश्चात परम आनंद की प्राप्ति होती है।
  6. विशुद्धि चक्र: विशुद्धि चक्र हमारे कंठ में मौजूद होता है और आपको बता दें कि इसके जागृत होने का संबंध संचार, आत्म-अभिव्यक्ति आदि से है। साथ ही साथ इससे हमारी वाणी शुद्ध होती है तथा संगीत विद्या भी सिद्ध होती है।
  7. अनाहत चक्र: अनाहत चक्र मनुष्य के हृदय में स्थित होता है और इसके बारे में बताया जाता है कि जो व्यक्ति इसे जागृत कर लेने में सफल हो जाता है उसके जीवन से कपट, चिंता, मोह तथा अहंकार जैसी चीजों का नाश होता है।

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