अगर आप आध्यात्मिक विकास करना चाहते तो क्रिया योग इसमें सबसे सहायक योग माना जाता है। क्रिया का अर्थ होता है करना। और ये योग की एक प्राचीन पद्धति है। ऐसा कहा जाता है कि साल 1861 के आसपास महावतार बाबाजी के शिष्य लाहिरी महाशय ने दोबारा से इसकी शुरुवात की। ये योग की वो तकनीक है जिसके ज़रिए आपने अपने आध्यात्मिक विकास को तेज़ कर सकते हैं। आज अपने इस लेख में हम आपको क्रिया योग से संंबंधित पूरी जानकारी आपको देंगे।

क्रिया योग आखिर है क्या….इसके कैसे करें और इसे करने के आखिरकार फायदे क्या हैं?

क्रिया योग (How To Do Kriya Yoga)

Kriya Yog Benefits
Upaya Yog

अगर आप अपनी एकाग्रता से भटक गए हैं या फिर अपने भीतर एकाग्रता लाना चाहते हैं तो इसमें क्रिया योग सबसे ज्यादा सहायक माना जाता है। क्रिया योग को पांच तरीकों से विश्लेषित किया गया है।

  1. क्रिया हठ योग –  ये योग शरीर की देखभाल के लिए किया जाता है। 
  2. क्रिया कुण्डलिनी प्राणायाम – यह व्यक्ति की चेतना एवं शक्ति को जगाने में सहायक होता है।
  3. क्रिया ध्यान योग – मन की शुद्धि के लिए ये योग फायदेमंद है| जिससे आप अपने भीतर एकाग्रता का विकास कर सकते हैं। 
  4. क्रिया मंत्र योग – अपने ज्ञान, बुद्धि तथा शरीर में मौजूद सात चक्र जाग्रत करने के लिए क्रिया मंत्र योग ज़रूरी है।
  5. क्रिया भक्ति योग – इसमें साधक को सभी कार्यों में सफलता हासिल होती है।

क्रिया योग के लिए ध्यान देने योग्य ज़रूरी बातें [Kriya Yoga Steps]

  • क्रिया योग को करने के लिए बेहद ध्यान की ज़रूरत होती है। 
  • व्यकित को अपने भीतर स्थिरता, एकाग्रता तथा खास तरह का अनुशाशन रखना होता है।
  • क्रिया योग के साधक को अपने गुरू की हर बात बिना सवाल पूछे माननी चाहिए।
  • यदि आप किसी भी चीज़ के लिए मूर्खतापूर्ण सवाल पूछते हो तब भी यह क्रिया नहीं की जा सकती।
  • आपको अपनी बुरी आदतों से पीछा छुड़ाना होता है। इसके लिए आप उन लोगों का साथ पकड़े जो बुरी आदतों के शिकार नहीं हैं।

क्रिया योग के फायदे (Kriya Yoga Benefits)

Kriya Yog Benefits
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अगर क्रिया योग(Kriya Yoga) के फायदों की बात करें तो इसके अनेकों लाभ में से एक है रोग मुक्ति। क्रिया योग के ज़रिए आप कई प्रकार के रोगों से मुक्ति पा सकते हैं और एक निरोगी काया के मालिक बन सकते हैं। इसके अलावा स्फूर्ति, भावनात्मक संतुलन, मानसिक शांति, तीक्ष्ण एकाग्रता, अन्तःप्रेरणा, ज्ञान क्रिया योग के ज़रिए हासिल किया जा सकता है। अगर क्रिया योग की क्रियाओं को नियमित रूप से किया जाए तो मनुष्य अपने भीतर बल पैदा करने के साथ खुद के अंदर शांति भी पा सकता है। यानि पूर्णतः शरीर, मन और आत्मा के कायाकल्प करने में क्रिया योग बेहद ही सहायक माना जाता है। 

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