Sardi me Navjat Shishu ki Dekhbhal: नवजात शिशु यानी न्यू बॉर्न बेबी बहुत ही नाजुक होते हैं। इनका जितना ज्यादा ख्याल रखो उतना ही कम होता है, इन्हें प्यार, केयर और खास देख-रेख की जरूरत होती है और ऐसे में आपको भी इसका पूरा ख्याल रखना चाहिए। नवजात शिशु के प्रति जरा सी लापरवाही उन्हें नुकसान दे सकती है। घर में शिशु का जन्म खुशियां लाता है और शुरुआती कुछ महीनों तक नन्हे शिशुओं की देखभाल करना काफी जरूरी भी होता है। इस दौरान आपकी की हुई छोटी गलतियां भी बच्चे के लिए सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (Sudden Infant Death Syndrome) यानी SIDS के मामले सामने ला सकते हैं।

नवजात शिशु की इस तरह करें देखभाल [Newborn Baby Care After Birth in Hindi]

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सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (Sudden Infant Death Syndrome) यानी SIDS के मामले में ऐसे केस सामने आते हैं जहां हमें लगता है कि हम बच्चे के भले के लिए काम कर रहे हैं लेकिन असल में ये उनकी जान भी ले सकते हैं। नवजात शिशु को ये सभी चीजें बिल्कुल नहीं करें जिससे उनका दम घुटे और लोगों की खुशियां गम में बदल जाएं।

शिशु का मुंह किसी कंबल से ना ढकें

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अक्सर सर्दी के मौसम में शिशु को ठंड से बचाने के लिए लोग उन्हें कंबल या रजाई से अच्छे से ढक देते हैं लेकिन ये शिशु के लिए नुकसानघातक होता है। आपको बता दें कि मुंह तक कंबल या रजाई से मुंह ढककर सुलाने से शिशु कई बार सांस लेने में परेशानी महसूस करने लगते हैं और बहुत छोटे होने के कारण कंबल या रजाई हटा भी नहीं सकते हैं। शिशु को बंद कमरे में सुलाएं और गर्दन तक ही उन्हें कंबल से ढकें। इसके अलावा शिशु के आसपास भारी खिलौने, तकिया, तौलिया भी नहीं रखें जिससे शिशु के मुंह पर लग जाए।

शिशु को पेट के बल ना सुलाएं

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शिशु को हमेशा पीठ के बल सुलाना चाहिए। इससे वो पूरी तरह से सांस ले सकता है और जल्दी बढ़ता भी है। उसके शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति सही तरीके से हो इसके लिए उन्हें पीठ के बल ही सुलाना चाहिए। मगर बहुत बार देखा गया है कि सोते समय बच्चे पलट जाते हैं और सीधे नहीं हो पाते, और पेट के बल सोने लगते हैं। इससे कई बार तकिया में शिशुओं का मुंह दब जाता है। नवजात शिशु के शरीर में इतनी क्षमता नहीं होती है कि असुविधा होने पर वे अपना शरीर मोड़ सकें। इसलिए आपको रात में एक से दो बार चेक करते रहना चाहिए।

शिशु को अलग कमरे में सुलाना

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नन्हे बच्चे को कभी अकेले नहीं छोड़ें, कम से कम 1 साल तक तो उसे अपने पास ही सुलाएं। शुशि को सुलाने के लिए क्रिब का इस्तेमाल करें या फिर उसे अपने से चिपकाकर ही सुलाएं। नन्हें शिशु को दूसरे कमरे में सुलाने से उसके रोने या परेशानी के दौरान आपको पता नहीं चल सकेगा और आप उसकी मदद के लिए देर भी कर सकते हैं। नवजात शिशुओं को शुरुआती दिनों में कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं, इसलिए हर समय उनके आस-पास किसी ना किसी को रहना बहुत जरूरी होता है।

क्रिब का सही चुनाव

CRIB for babies
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CRIB एक तरह का छोटा सा बेड होता है जिसपर लोग नवजात शिशु को सुलाने, लिटाने या बैठाने के काम में लाते हैं। ये इस तरह से बनाया जाता है जिससे बच्चे गिर नहीं पाएं। मगर क्रिब खरीदते समय आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए जिससे बच्चे को किसी भी तरह की तकलीफ नहीं हो। गलत क्रिब का चुनाव बच्चे में SIDS का खतरा बढ़ाता है। क्रिब चुनते समय उसके सेफ्टी स्टैंडर्स का ख्याल रखें और उसपर बहुत ही मुलायम बिस्तर बिछाएं। गद्दा इतना सॉफ्ट नहीं हो कि बच्चा नीचे चला जाए या इतना कड़ा ना हो कि बच्चे को लगने लगे। इसके अलावा बिस्तर पर बिछी चादर भी ढीली नहीं होनी चाहिए।

बुखार को नहीं करें नजरअंदाज

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ठंड के समय अक्सर लोग बच्चों को रूम हीटर या ब्लूमर के सामने लिटा देते हैं जिससे नजवाज शिशु को ठंड ना लगे। मगर यही माता-पिता गलती कर देते हैं क्योंकि बहुत ज्यादा गर्मी शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। नन्हे शिशु में बुखार एक आम समस्या होती है और अगर बच्चे को गर्म में बच्चे और गर्म हो जाएं और उन्हें पसीना आ जाए तो बच्चे को SIDS का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए कि बच्चे के लिए कमरे का टैंपरेचर कितना होना चाहिए।

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