रुद्राक्ष का संबंध भगवान शंकर से होता है। रुद्र का मतलब होता है शिव और अक्ष का मतलब होता है नेत्र। रुद्राक्ष ज्यादातर पर्वतीय क्षेत्रों में ही पाया जाता है ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी लोक पर रुद्राक्ष मानव जाति के कल्याण के लिए आया है। शिवभक्त रुद्राक्ष को उसी तरह से पसंद करते हैं जितने प्रिय उनके लिए खुद भोले शंकर हैं। लेकिन असल मायने में रुद्राक्ष धारण करने से पहले इसके बारे में जानना और इसके उपयोग को समझना भी बेहद जरूरी होता है। ऐसी मान्यता है कि रुद्राक्ष इंसान के जीवन में आने वाली हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और रक्षा करता है। रुद्राक्ष केवल तपस्वी ही नहीं बल्कि आम जीवन जीने वाले लोग भी धारण कर सकते हैं।

हिंदू धर्म की मान्यता के मुताबिक रुद्राक्ष का वृक्ष और फल दोनों ही पूजनीय है। रुद्राक्ष धारण करने से मानव जीवन में आने वाले रोग, शोक और बाधाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। रुद्राक्ष में मौजूद चुंबकीय और विद्युत ऊर्जा से मानव शरीर को एक अलग ही तरह का लाभ प्राप्त होता है।

रुद्राक्ष की एक खासियत यह होती है कि यह आपके शरीर से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा को पकड़ कर रखता है और आपके इर्द-गिर्द एक कवच तैयार कर देता है। जिससे बाहर से आने वाली नाकारात्मक उर्जा आपको परेशान नहीं करती हैं।

सामान्य तौर पर पंचमुखी रुद्राक्ष हमें कहीं भी देखने को मिल जाता है। लेकिन असल मायने में रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर चौमुखी तक उपलब्ध है। लेकिन यह बेहद दुर्लभ है। रुद्राक्ष कितने मुख का है इसकी पहचान करने के लिए उस पर उकेरी लकीरों को गिना जाता है। अगर किसी रुद्राक्ष के ऊपर एक लकीर है तो वह एक मुखी रुद्राक्ष है। लेकिन वहीं अगर किसी रूद्राक्ष के ऊपर 5 लकीरें हैं तो वह पंचमुखी रुद्राक्ष है। रुद्राक्ष पहनने से धन, मोक्ष एवं शांति की प्राप्ति होती है। आपके जीवन में आने वाले अशुभ फलों से रुद्राक्ष आपको मुक्ति दिलाता है।

रुद्राक्ष धारण करने के बाद कैसे होगा फायदा

अगर आपको लगता है कि रुद्राक्ष धारण मात्र कर लेने से आपके जीवन में आने वाली हर बाधाएं खत्म हो जाएगी और आपको कामयाबी मिलने लगेगी तो आप यहां गलत है। रुद्राक्ष धारण करने के बाद आपको हर तरह की गलत आदतों को छोड़ना होगा। ऐसा नहीं है कि आप मांस और मदिरा का सेवन नहीं कर सकते हैं। लेकिन आपको बड़ों का सत्कार, माता-पिता की सेवा और अपने कर्म पर विशेष ध्यान देना होगा। इसे धारण करने के बाद झूठ बोलना पूरी तरह से बंद कर दें। हां लेकिन अगर कहीं आपकी जान पर बनाए तो आप इसका सहारा ले सकते हैं। रुद्राक्ष धारण करने के बाद सुबह शाम आपको भगवान शंकर का ध्यान लगाकर उनका धन्यवाद करना बेहद जरूरी होता है। रुद्राक्ष धारण करके किसीके अंतिम संस्कार या जहां किसी नवजात का जन्म हुआ है वहां जाने से परहेज करना होता है।

रुद्राक्ष की पहचान

अगर आप धन प्राप्ति के लिए रुद्राक्ष धारण करना चाहते हैं तो आप 62 दानों की माला को ग्रहण करें। लेकिन अगर आप सुख समृद्धि और शांति के लिए रुद्राक्ष धारण करना चाहते हैं। तो आपके लिए 108 दाना वाली माला लाभदायक साबित हो सकती है। वैसे तो रुद्राक्ष के माला को सोना या चांदी में भी धारण किया जाता है। लेकिन अगर आप सोना या चांदी धारण करने में समर्थ नहीं है तो इसे सूत या रेशम में भी धारण कर सकते हैं। असली और नकली रुद्राक्ष की पहचान करने के लिए आप एक शीशे के गिलास में पानी भरकर उसमें रुद्राक्ष के दाने को डाल दीजिए। अगर रुद्राक्ष पानी की सतह में पहुंच जाता है तो इसका मतलब है कि रुद्राक्ष असली है। लेकिन अगर वह तैरता रहता है तो या तो रुद्राक्ष अंदर से सड़ा हुआ है या फिर नकली है। ऐसी मान्यता है कि आंवले के समान दिखने वाला रुद्राक्ष सबसे श्रेष्ठ होता है लेकिन अगर आपको सुख और समृद्धि के लिए रुद्राक्ष धारण करना है तो आप बेर की तरह दिखने वाले छोटे-छोटे रुद्राक्ष के दानों की माला को धारण कर सकते हैं। वैसे तो मंत्र उच्चारण का जाप करने के लिए कई तरह की मालाएं बाजार में उपलब्ध है। लेकिन फिर भी रुद्राक्ष को जाप करने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि रुद्राक्ष धारण करने के बाद आपको खानपान में किसी भी तरह का परहेज करना चाहिए। लेकिन फिर भी अगर आप रुद्राक्ष धारण करने के बाद मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन इत्यादि का सेवन करना बंद कर देते हैं तो यह आपके लिए और भी लाभप्रद और फलदाई साबित हो सकता है। रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसे पहले भगवान शंकर के ऊपर अर्पित करें और फिर “ॐ त्रयंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव वंदना मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् मंत्र का 11 बार जाप करें उसके बाद भगवान शंकर के विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद रुद्राक्ष को धारण करें रुद्राक्ष धारण करने के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र माना जाता है रुद्राक्ष को कभी भी सोमवार के दिन ही धारण करना चाहिए।

Facebook Comments