Bajrang Baan Benefits:-हिंदू धर्म में कई देवी देवता ऐसे हैं जिनके प्रति लोगों की आस्था बहुत ही प्रबल है और उनके लिए समय-समय पर लोग तरह-तरह की पूजा-अर्चना आदि करते रहते हैं, ताकि उनके ऊपर भगवान की कृपा
हमेशा बनी रहे। ऐसे ही हैं हमारे प्रभु श्री राम के परम भक्त भगवान हनुमान। आपको बता दें कि
हनुमान जी को और भी कई नामों से इनके भक्त पुकारते हैं, जिनमे से एक प्रसिद्ध नाम संकट मोचक
भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि जो भी व्यक्ति बजरंग बली की सच्चे मन से पूजा करता
है, हनुमान जी उनके सभी दुखों को हर लेते हैं। वैसे तो हनुमान जी से संबंधित कई तरह के पाठ जुड़े हुए
हैं और पुराणों-शास्त्रों में भी बताया गया है कि जो भी व्यक्ति इन पाठों को पढ़ता है उस पर हनुमान जी
की हमेशा कृपा बनी रहती है।

हनुमान जी को बेहद प्रिय है ‘श्री बजरंग बाण पाठ’

bajrang path

हनुमान चालीसा से बजरंग बली का हर भक्त बेहतर परिचित होगा। मगर आपको बता दें कि इसके
अलावा श्री बजरंग बाण पाठ भी हनुमान जी के पाठों में से एक है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह
पाठ हनुमान जी को बेहद ही प्रिय है और जो कोई भी भक्त इसका पाठ करता है प्रभु उस पर अपनी
कृपा बनाए रहते हैं। मान्यता है कि इस पाठ को पढ़ने से कोई भी कार्य पूर्ण हो जाता है और स्वयं
हनुमान जी आपकी रक्षा करते हैं। मगर आपको बता दें कि जितना चमत्कारी यह पाठ है उतना ही
विशेष ध्यान इसका पाठ करते समय रखना चाहिए। आज हम आपको बताएंगे कि श्री बजरंग बाण का
पाठ करते समय किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए, ताकि इससे सिर्फ लाभ ही मिले ना कि
इसका कोई दुष्प्रभाव पड़े।

पाठ करते वक्त ध्यान रखें ये जरूरी बातें

1. सर्वप्रथम तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बजरंग बाण हनुमान जी से जुड़ा हुआ एक बेहद ही
महत्वपूर्ण स्त्रोत है। यही वजह है कि इस पाठ को विशेष रूप से मंगलवार के दिन ही पढ़ने की सलाह
दी जाती है, जिसे हनुमान जी का प्रिय दिन माना जाता है।
2. बजरंग बाण का पाठ आप अपने आस-पास मौजूद बजरंग बली के मंदिर या फिर अपने घर में स्थित
पूजा घर में भी कर सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब भी यह पाठ करें तो इसका ध्यान रखें कि
सामने जिसे हनुमान जी का प्रिय दिन माना जाता है।                                                                          3. जब भी आप बजरंग बाण पाठ करें तो शाम के वक़्त ही करें और इस दौरान आप इस बात का ध्यान
रखें की सभी शब्द का सही-सही उच्चारण हो। अन्यथा गलत उच्चारण करने की वजह से पाठ का कोई
लाभ नहीं होता।
4. बजरंग बाण पाठ करते समय इस बात का ध्यान रखें कि इस दौरान आप अपने पास एक दीपक
अवश्य जला दें और पाठ खत्म होने तक वह दीपक प्रजाव्ल्लित होता रहे।
5. आमतौर पर आप चाहें तो इस पाठ को किसी भी दिन पढ़ सकते हैं, मगर इसकी शुरुवात आप
मंगलवार के दिन ही करें

कहते हैं कि जो भी व्यक्ति अपने जीवन काल में बजरंग बाण का पाठ करता है, उसके जीवन से हर
तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं और सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि उसके जीवन में आने वाले सभी
कष्टों का भी निवारण हो जाता है। यदि आपको किसी तरह का भय हो या कोई बुरी शक्ति आपके ऊपर
अपना प्रभाव दिखा रही है तो आप बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें। इससे आपको काफी ज्यादा राहत
मिलेगी और सभी तरह की नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाएंगी।

श्री बजरंग बाण पाठ इस प्रकार है

bajrang baan benefits

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान ॥
जय हनुमन्त संत हितकारी | सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ||
जन के काज बिलम्ब न कीजै | आतुर दौरि महासुख दीजै ||
जैसे कूदी सिन्धु महि पारा | सुरसा बदन पैठी विस्तारा ||
आगे जाय लंकिनी रोका | मोरेहु लात गई सुर लोका ||
जाय विभीषण को सुख दीन्हा | सीता निरखि परम-पद लीना ||
बाग़ उजारि सिन्धु मह बोरा | अति आतुर जमकातर तोरा ||
अक्षय कुमार मारि संहारा | लूम लपेटि लंक को जारा ||
लाह समान लंक जरि गई | जय-जय धुनि सुरपुर में भई ||
अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी | कृपा करहु उर अन्तर्यामी ||
जय जय लखन प्रान के दाता | आतुर होई दु:ख करहु निपाता ||
जै गिरिधर जै जै सुख सागर | सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले | बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहि मारो | महाराज प्रभु दास उबारो ||

ॐकार हुंकार महा प्रभु धाओ | बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ ||
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा | ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर-सीसा॥
सत्य होहु हरी शपथ पायके | राम दूत धरु मारू जायके
जय जय जय हनुमन्त अगाधा | दुःख पावत जन केहि अपराधा ||
पूजा जप-तप नेम अचारा | नहिं जानत हो दास तुम्हारा ||
वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं | तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ||
पायं परौं कर जोरी मनावौं | येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ||
जय अन्जनी कुमार बलवंता | शंकर सुवन वीर हनुमंता ||
बदन कराल काल कुलघालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक ||
भूत प्रेत पिसाच निसाचर। अगिन वैताल काल मारी मर ||
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की | राखउ नाथ मरजाद नाम की ||
जनकसुता हरि दास कहावो | ताकी शपथ विलम्ब न लावो ||
जै जै जै धुनि होत अकासा | सुमिरत होत दुसह दुःख नासा ||
चरण शरण कर जोरि मनावौं | यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ||
उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई | पायँ परौं, कर जोरि मनाई ||
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता | ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ||
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल | ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल ||
अपने जन को तुरत उबारौ | सुमिरत होय आनंद हमारौ ||
यह बजरंग बाण जेहि मारै| ताहि कहो फिर कोन उबारै ||
पाठ करै बजरंग बाण की | हनुमत रक्षा करैं प्रान की ||
यह बजरंग बाण जो जापैं | ताते भूत-प्रेत सब कापैं ||
धूप देय अरु जपै हमेशा | ताके तन नहिं रहै कलेसा ||
दोहा: प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान |
तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान |

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