ये काम पितृपक्ष के दौरान माने जाते हैं अशुभ, जिन्हें करने से पीतर हो जाते हैं नाराज

shradh me kya na kare

हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल कृष्ण पक्ष की तिथि पर पितृ पक्ष आरंभ होता है। इस दौरान अपने पितरों को मनाने के लिए कुछ नियमों को अपनाया जाता है। इस साल पितृपक्ष 25 सितंबर को मनाया जाएगा। पितृपक्ष का मतलब होता है श्राद्धपक्ष। इस दौरान अपने पीतरों को याद करके उनसे आशीर्वाद ली जाती है। ऐसा करने से घर में सुख शांति और समृद्धि बरकरार रहता है। हिंदू धर्म के मुताबिक ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद ही जरूरी होता है। ताकि पितरों की कृपा सदैव हम पर बनी रहे। इन नियमों का पालन करने से हमारी आने वाली पीढ़ी और भविष्य काफी सुरक्षित रहती है।

तो चलिए जानते हैं उन नियमों के बारे में जिनका पालन करना पितृपक्ष के दौरान बेहद जरूरी होता है।

shradh me kya na kare

1. महिला पुरुष दोनों ब्रह्मचर्य का पालन करें

पितृपक्ष के दौरान महिला हो या पुरुष हर किसी को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दौरान शारीरिक संबंध बनाने से परहेज करें। ऐसा कहते हैं कि पितृपक्ष के दौरान आपके पीतर बेहद सूक्ष्म रूप में आपके घर पर मौजूद होते हैं। यह ऐसा समय होता है जब इंसान को अपने पूर्वजों को याद करके उनका आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए। यही कारण है कि इस दौरान वासना से दूर रहना ही बेहतर होता है।

2. बाल न कटवाएं

पितृपक्ष के दौरान महिला एवं पुरुष को बाल नहीं कटवाना चाहिए। खास करके पुरुषों को दाढ़ी मूछ बनाने से परहेज करना चाहिए। पितृपक्ष समाप्त होने के बाद ही पिंडदान करने से पहले दाढ़ी, मूंछ उतरवाना पितृपक्ष के नियमों में शामिल है।

3. खास तरह के भजनों का होता है महत्व

पितृपक्ष के दौरान खानपान के लिए लोहे के बर्तन का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। लेकिन पितृपक्ष के आखिरी दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाता है। इस दौरान पत्तल में ही भोजन करवाना शुभ माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक पत्तल में ब्राह्मणों को भोजन करवाना बेहद फलदाई होता है।

4. गरीबों को करें दान

पितृपक्ष का पूरा महीना दान पुण्य के लिए काफी अहम माना जाता है। ऐसा कहते हैं कि इस दौरान अपने दरवाजे से किसी के भिखारी या गरीब को खाली हाथ नहीं लौटाया जाता है। अगर आप रुपए पैसे देने में सक्षम नहीं है तो जलपान या भोजन का दान जरूर करें। ऐसा करने से आपके घर में कभी लक्ष्मी की कमी होती है।

5. परिवार के साथ मिलजुल कर रहें

पितृपक्ष के दौरान आपके पीछे आपके इर्द-गिर्द ही घर में मौजूद होते हैं और अपने परिवार के सदस्यों का बर्ताव ध्यान पूर्वक देखते हैं। इस दौरान परिवार के सदस्यों को आपस में मिल जुल कर रहना चाहिए। परिवार में प्रेम देखकर पितृगण काफी प्रसन्न होते हैं। जिस घर में कलह और लोगों में टकराव होता है तो उस घर से पितृगण नाराज होकर चले जाते हैं।

6. दोपहर में ही करवाएं ब्राह्मण भोज

किसी की मृत्यु के बाद तर्पण के लिए शास्त्रों में काले तिल का महत्व बताया गया है। इसीलिए इस बात का ध्यान रखें कि तर्पण देते समय केवल काले तिल का इस्तेमाल करें। और इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन दोपहर में ही करवाना चाहिए। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि सुबह और शाम की बेला भगवान की होती है। लेकिन आधा प्रहर पितरों का होता है।

7. गृह प्रवेश ना करें

पितृपक्ष के दौरान नए घर में प्रवेश करने से पीतर नाराज हो जाते हैं। इसलिए इस दौरान गलती से भी नए घर में गृह प्रवेश ना करें। पितृपक्ष के दौरान नया घर लेने से पितरों  को कोई तकलीफ नहीं होती है। लेकिन ऐसा कहते हैं कि पीतर वही आते हैं। जहां आप पहले से रह रहे हैं तो अगर आप गृह प्रवेश करना चाहते हैं तो पितृपक्ष के बाद या पितृपक्ष के पहले वाले महीने में करें।

8. तामसी भोजन से करें परहेज

इस दौरान जो लो अपने पितरों का पूजन और पिंडदान करते हैं। उन लोगों को तामसी भोजन जैसे के मांस मदिरा इत्यादि का सेवन करने से बचना चाहिए। पूरे महीने सात्विक भोजन ही करें। इससे मन शांत रहता है और आपका ध्यान आपके पितरों पर ही होता है। हालांकि जिनके माता-पिता जीवित हैं। उनके लिए इस दौरान भोजन करने के कोई खास नियम नहीं है।

9. जानवरों से प्रेम करें

कहते हैं कि पितृपक्ष के दौरान आपके पीतर आपके घर पर किसी भी रूप में आ सकते हैं। चाहे वह किसी जीव जंतु का रूप हो चाहे पक्षी का, इसलिए इस दौरान किसी भी जानवर को परेशान ना करें। चिड़ियों को दाना डालें सड़क पर चलने वाले कुत्ते गाय और अन्य मवेशियों को रोटी दें। हालांकि पितृपक्ष के महीने में ज्यादा गर्मी तो नहीं होती। लेकिन फिर भी जहां कहीं भी कोई प्यासा जानवर दिखे उसे पानी जरूर पिलाएं। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि केवल पितृपक्ष के दौरान ही आप जानवरों का सम्मान करें। सामान्य दिनों में भी जानवरों को कष्ट पहुंचाना सही नहीं माना गया है।
Facebook Comments