कुश्ती….यानि दंगल…भारत का एक परंपरागत खेल और मनोरंजन का बहुत पुराना साधन है। पहले जब टीवी का दौर नहीं था तो अक्सर मेलों या सामाजिक अवसरों पर कुश्ती की प्रतियोगिताओं का ही आयोजन किया जाता है जिनमें लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे।साल 1896 में जब आधुनिक ओलंपिक खेलो का आरंभ हुआ, तब कुश्ती के खेल को उसमें सम्मिलित किया गया था।

कैसे खेला जाता है कुश्ती का खेल?

मौजूदा समय में कुश्ती के खेल की अवधि 5 मिनट की है। लेकिन 16 वर्ष से कम आयु वर्ग के लिए 4 मिनट का खेल निर्धारित किया जाता है। अगर किसी भी वजह से इस तय अवधि में कोई भी पहलवान विजयी घोषित न हो पाए तो 3 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है। कुश्ती का खेल उस वक्त जानलेवा भी हो जाता है जब कोई खतरनाक दांव लगा दिया जाता है। ऐसे में कोई भी खिलाड़ी ऐसी कोई भी चीज नहीं पहन सकता, जिससे चोट लगने की आशंका हो। मैच में हर स्थिति का फैसला रेफरी लेता है। वहीं रेफरी के हर फैसले पर जज की निगाह रहती है अगर कहीं भी रेफरी के निर्णय पर जज को कोई डाउट होता है तो जज बैटन उठाकर इसका संकेत करता है और कुश्ती के चेयरमैन को स्कोरशीट देता है| निरीक्षण के बाद वह अंतिम निर्णय घोषित करता है।

कुश्ती के प्रकार – मौजूदा वक्त में कुश्ती दो तरीकों से खेली जाती है। फ्री स्टाइल और ग्रीको-रोमन।

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कैसे खेलें कुश्ती

कुश्ती मैट के ऊपर होती है। दोनों पहलवान मैट पर आने के बाद सबसे पहले एक दूसरे से हाथ मिलाते हैं। उसी समय रेफरी दोनों की जांच करता है और ये चेक किया जाता है कि किसी खिलाड़ी के पास आपत्तिजनक कोई वस्तु तो नहीं है| इसके बाद रेफरी दोनों खिलाड़ियों को अखाड़े के सिरो पर भेज देता है| और फिर सीटी बजाकर खेल शुरू करने की घोषणा कर दी जाती है।

कुश्ती के खेल के नियम

  • कुश्ती में अंक हासिल करने के लिए दांव लगाकर विरोधी पहलवान को चित करना होता है।

  • अगर एक खिलाड़ी विरोधी प्लेयर को पाँच सेकंड से अधिक समय तक खतरे में डाले रखता है तो खिलाड़ी को प्लाइंट दिए जाते हैं।

  • वहीं हर खेल की तरह कुश्ती में भी कई स्थितियों में फाउल माना जाता है। अगर कोई पहलवान दूसरे खिलाड़ी के पांव पर चढ़ जाएं तो फाउल माना जाता है।

  • अगर विरोधी पहलवान के मुंह व भौंहों के बीच के हिस्से को छू दिया जाए तो भी फाउल माना जाता है।

  • कुश्ती के खेल में गला दबाना, गद्दे के किनारे पकड़ना, बालों को खीचना, गुप्तांगों पर प्रहार करना, पोशाक खींचना, हाथो द्वारा पांवो की उंगली मरोड़ना या जानबूझ कर ऐसा दांव लगाना, जिससे मृत्यु या किसी अंग के टूटने की संभावना हो, वर्जित होता है। ऐसा होने पर फाउल माना जाता है।

कुश्ती के खेल में जब भी कोई नियम के विरूद्ध जाता है तो उसे पहले चेतावनी दी जाकी है लेकिन चेतावनी मिलने के बाद भी अगर बार-बार नियम का उल्लंघन किया जाए तो  कॉशन दिया जाता है। अब आपको बताते हैं कि किन परिस्थितियों में कॉशन दिया जाता है।

  • किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता पर

  • बार-बार नियम तोड़ने पर

  • चेतावनी के बाद भी रेफरी की बात पर ध्यान न देने पर

  • किसी भी बात को लेकर जज से बहस करने पर

  • कॉशन के संकेत के लिए रेफरी अपनी एक बाजू ऊपर उठाकर दूसरे हाथ से गलती करने वाले पहलवान का एक हाथ ऊपर उठा देता है। वहीं अहम बात ये है कि चार कॉशन मिलने पर पहलवान को हारा मान लिया जाता है।

कैसे मिलते हैं अंक

 1.चित करके जीतने वाले को 4 अंक मिलते हैं।

 2.12 अंक के अंतर या इससे अधिक अंकों से विजेता को 4 अंक व पराजित को शून्य अंक मिलते हैं|

 3. 8 से 11 अंक के अंतर से विजेता को 3.5 अंक और पराजित को 1.5 अंक मिलते है|

 4. शून्य से 7 के अंतर पर विजेता को 3 व पराजित को एक अंक मिलता है|

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