No Cost EMI Kya Hai: जब भी आप क्रेडिट कार्ड पेमेंट करते हैं तो आपको कई तरह की सुविधाएं मिल जाती हैं, उनमें से एक है No Cost EMI, जिसमें आपको ना तो ब्याज देना होता है, ना प्रोसेसिंग फीस चुकानी होती है। बस जो भी आप खरीद रहे हैं उसका दाम देना होता है वो भी निर्धारित समय पर इसे आप ईएमआई के माध्यम से देते हैं और ये आपके खाते से खुद ही कट जाता है। अब इसका दूसरा रूप ये है कि जब एक क्रेडिट कार्ड कंपनी से आप ईएमआई से कोई चीज खरीदते हैं तो आपको इसपर 8 से 15 प्रतिशत तक ब्याज देना होता है और इसके साथ ही 0.5% से 3 प्रतिशत तक प्रोसेसिंग फीस भी देनी होती है।
No Cost EMI
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अगर आप मोबाइल, टीवी, फ्रीज या कोई दूसरी महंगी चीज खरीद रहे हैं तो लोन प्रदाता कंपनियां जैसे बजाज फाइनेंस, फुलट्रॉन क्रेडिट कार्ड कंपनियों से टाईअप करके आपको ऐसी सुविधा प्रदान करा देती है। दरअसल इस सुविधा के जरिए ईएमआई आपके क्रेडिट कार्ड से कटता जाता है और उसकी कीमत आपके मासिक क्रेडिट कार्ड बिल में जुड़ जाती है।साल 2013 में रिजर्व बैंक ने बैंकों को उत्पादों पर जीरो कॉस्ट ईएमआई पर प्रतिबंध लगा दिया था। मगर बाद में नो कॉस्ट ईएमआई का विकल्प साने आया, हालांकि बैंकों के नियम ब्याज रहित लोन की इजाजत नहीं देते हैं। दरअसल नो कॉस्ट ऑफ ईएमआई बैंक या फाइनेंशियल कंपनी द्वारा नहीं बल्कि फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी ऑनलाइन कंपनी के विक्रेताओं ने शुरू की है। इसमें ये कंपनियां आपको डिस्काउंट देंती हैं जो कि बैंक द्वारा वसूल किए जाने वाले ब्याज जितना होता है। इसलिए अंत में आपको EMI के अतिरिक्त ब्याज के पैसे नहीं देने होते है।

No Cost EMI
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इस तरह अगर आपने 12000 रुपए का कोई भी सामान 6 माह की अवधि के लिए खरीदा है तो आपको हर माह 2000 रुपए चुकाने होंगे। क्योंकि आपको ये लोन क्रेडिट कार्ड कंपनी ने नहीं, फाइनेंशियल कंपनी ने दिया है और आपको उस फाइनेंशियल कंपनी का ग्राहक होना जरूरी है।

क्यो नहीं चुनना चाहिए ये विकल्प?

अगर एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक, यस बैंक धारक अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट से सामान खरीदते हैं तो उन्हें नो कॉस्ट ईएमआई का ऑपशन मिल जाते हैं, हालांकि ऐसा भी हो सकता है कि अगर आप नकद चीजें खरीदें तो उस पर मिलने वाला डिस्काउंट ईएमआई पर मिलने वाले ब्याज से अधिक हो। कई बार आप ईएमआई के चक्कर में ज्यादा महंगा सामान खरीद लेते हैं जिससे आपका बजट गड़बड़ हो जाता है। अगर आप क्रेडिट कार्ड बिल की आखिरी तारीख तक बिल का भुगतान नहीं करते तो आपको लगभग 750 रुपए फाइन भी भरना देना होता है। इससे बचने के लिए अगर हो सके तो जितने का सामान आपको लेना है उसका पैसा आपको पहले से ही इकट्ठा कर लेना चाहिए और नो कॉस्ट ऑफ ईएमआई से बचना चाहिए।

क्या होता है No Cost of EMI से फायदा (What Is No Cost EMI)

अगर कोई कस्टमर 12000 का सामान खरीदना चाहता है और उसके पास ये रकम पूरी नहीं है तो तो वो अलग-अलग किश्तों में ये सामान आसानी से खरीद सकता है। ईएमआई पर लगने वाला ब्याज उन्हें नहीं देना होता है। अब जानना चाहते होंगे कि इससे ऑनलाइन शॉपिंग साइट को क्या फायदा होता है तो बता दें कि ये कंपनी अपने उन प्रोडक्ट्स पर नो कॉस्ट ऑफ ईएमआई का ऑफर देती है जो कम बिकते हैं या जिनकी डिमांड कम होती है। No Cost of EMI देने से कंपनी के कम बिकने वाले प्रोडक्ट भी ज्यादा बिकने लगते हैं। इससे बैंक को फायदा होता है क्योंकि इसमें उनके क्रेडिट कार्ड का भी यूज हो जाता है और ये सभी को पता है कि क्रेडिट या डेबिट कार्ड का यूज करने से बैंक भी कुछ प्रतिशत चार्ज काट लेता है।

No Cost of EMI के जरिए आप कोई भी सामान आसानी से खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं लेकिन फिर भी हम कहेंगे कि ऑनलाइन शॉपिंग करते समय आपको पूरे टर्म एंड कंडीशन पूरी तरह से पढ़ लेने चाहिए। इससे आपकी शॉपिंग अच्छे से हो सकती है और बाद में आपको किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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