Pachmarhi Tourism in Hindi: भारत के मध्य में स्थित राज्य मध्य प्रदेश अपनी कई सारी खासियत की वजह से लोकप्रिय है और आज हम आपको इसी राज्य के एक बेहद ही खूबसूरत हिल स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पचमढ़ी या पचमढ़ी कैंट के नाम से जाना जाता है। यहां के स्थानीय लोग इसे सतपुड़ा की रानी के नाम से भी पुकारते हैं जो कि यहां आने वाले लोगों के बीच भी काफी ज्यादा मशहूर हो चुका है। बता दें कि होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी तकरीबन 1100 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती भारी संख्या में पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में पचमढ़ी में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सैलानियों का तांता लगा रहता है। मध्य प्रदेश का एक मात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी सिंध व सतपुड़ा की सुंदर पहाड़ियों से घिरा है। यह पर्यटन स्थल मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा पर्यटन स्थल है।

मध्य प्रदेश का ‘कश्मीर’ है पचमढ़ी

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सतपुड़ा की वनाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओ में बसा पचमढ़ी अपने प्राकृतिक नैसर्गिक सौंदर्य के कारण देश ही नही बल्कि विदेशी पर्यटको में भी आकर्षण का केंद्र है। यहां का शांत वातावरण, खिलखिलाते पहाड़, सदाबहार हरियाली, गुनगुनाते झरने और उसमें रंग भरती रंग-बिरंगी छटाएं और मन भावन दृश्य पर्यटकों को अपना बना लेते हैं। पचमढ़ी को मध्य क्षेत्र का कश्मीर भी कहा जाता है। यहां पर्यटकों के देखने व मनोरंजन के लिए बहुत कुछ है। श्री पांच पांडव गुफा पंचमढी, जटाशंकर, सतपुड़ा राष्ट्रीय अभयारण्य यहां के मुख्य आकर्षण हैं। यह ब्रिटिश राज के बाद एक छावनी का स्थान रहा है। यहां मध्य प्रदेश और सतपुड़ा रेंज का सबसे ऊंचा बिंदु धुपगढ़ स्थित है, जो कि पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व का एक हिस्सा है।

निर्वासन के दौरान पांडवों ने किया था गुफाओं का निर्माण

बताया जाता है कि इस स्थान का नाम पचमढ़ी हिंदी शब्द पंच यानी की “पांच” और मढ़ी यानी कि “गुफाओं” से लिया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, यहां पर मौजूद तमाम गुफाओं को महाभारत युग के पांच पांडव भाइयों ने अपने तेरह वर्ष के निर्वासन के दौरान बनाया था। यह गुफाएं पहाड़ी की चोटी पर स्थित हैं, जो एक उत्कृष्ट दृश्य प्रदान करती हैं और पचमढ़ी के दर्शनीय स्थलों में से एक है। यहां बसे घने जंगल, मदमाते जलप्रपात, पवित्र निर्मल तालाब और यहां की गुफाएं ना सिर्फ पर्यटन उद्देश्य से आकर्षक हैं बल्कि पुरातात्विक दृष्टिकोण से इनका काफी ज्यादा महत्व है क्योंकि गुफाओं में शैलचित्र भी मिले हैं। यहां की प्राकृतिक संपदा को पचमढ़ी राष्ट्रीय उद्यान के रूप में संजोया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं यहां आपको गौर, तेंदुआ, भालू, भैंसा तथा अन्य जंगली जानवर सहज ही देखने को मिल जाते हैं। इस क्षेत्र में घूमने के लिए आप पचमढ़ी से जीप या स्कूटर ले सकते हैं।

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पचमढ़ी के जंगलों और गुफाओं के अलावा यहां तकरीबन 3 किलोमीटर की दूरी पर बी फॉल है। यह एक प्रसिद्ध झरना है जो करीब 150 फीट की उंचाई से गिरता है और पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देता है। पर्यटक इसके ठंडे पानी में जल क्रीड़ा का आनंद उठा सकते हैं। इसके अलावा यहां पर नजदीक में ही अप्सरा फॉल भी है, जो अपने नाम की तरह ही बेहद खूबसूरत व आकर्षक है। जंगलों के मध्य स्थित यह फॉल पिकनिक मनाने व जल क्रीड़ा के लिए उपयुक्त स्थान है। यहां पहुंचने के लिए सैलानियों को डेढ़ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

1857 में हुई थी हिल स्टेशन की खोज

आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि पचमढ़ी गौंड जनजाति के आदिवासी वंश की राजधानी थी। गौंड आदिवासियों के राजा भावुत सिंह थे। सन 1857 में ब्रिटिश सेना के कैप्टन जेम्स फोरसिथ ने पचमढ़ी हिल स्टेशन की खोज की और इसका परिचय विश्व से करवाया। वैसे इस बेहद ही रहस्यमयी और लुभावनी जगह यानी कि पचमढ़ी में आधुनिक विकास का श्रेय जेम्स फोरसिथ को जाता है क्योंकि उनके जोश और जुनून का ही नतीजा था कि आज पूरे विश्व में इसकी एक अलग पहचान बन चुकी है।

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