Somnath Temple History in Hindi: भारतवर्ष एक हिंदू प्रधान धार्मिक देश है जहां पर कई सदियों से साधू-महात्मा और अन्य कई महापुरुष आदि निवास करते आए हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि आज की तारीख में प्राचीन परंपरा समाप्त हो चुकी है, जबकि आपको बता दें कि हमारे देश में आज भी संतों का बहुत ही सम्मान किया जाता है और घर आए साधू लोगों को कभी खाली हाथ वापिस नहीं जाने दिया जाता है। आपको यह भी बता दें कि हमारे इसी देश में हिंदू धर्म के अलावा भी अन्य कई सारे धर्म के लोग निवास करते हैं। बताना चाहेंगे कि हिंदू प्रधान देश होने की वजह से यहां पर कई देवी देवताओं की पूजा की जाती है, जिनमें से कुछ बहुत ही ज्यादा खास महत्व रखते हैं और उन्हीं में से एक हैं शंकर भगवान। भगवान भोलेनाथ, शम्भूनाथ, काशी विश्वनाथ, नीलकंठ आदि नामों से जाने जाने वाले भोलेनाथ को समर्पित सोमनाथ मंदिर भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर गुजरात नामक प्रदेश में स्थित है, जो कि अत्यंत प्राचीन व ऐतिहासिक सूर्य मंदिर का नाम है।

भगवान शिव को समर्पित है सोमनाथ मंदिर

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सोमनाथ का अर्थ है “भगवानों के भगवान”, जिसे भगवान शिव का अंश माना जाता है। गुजरात का सोमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और आपको यह जानकर काफी हैरानी होगी कि यह मंदिर ऐसी जगह पर स्थित है जहां अंटार्कटिका तक सोमनाथ समुद्र के बीच एक सीधी रेखा में कोई भूमि नहीं है। सोमनाथ मंदिर के प्राचीन इतिहास और इसकी वास्तुकला और प्रसिद्धि के कारण इसे देखने के लिए देश और दुनिया से भारी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। आपको पता होना चाहिए कि यह भारतीय इतिहास तथा हिंदुओं के चुनिंदा और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। सिर्फ इतना ही नहीं इस मंदिर की महत्ता इससे पता चलती है कि ये सभी 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है, जो कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं। यह मंदिर भारत में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से पहला माना जाता है। यह गुजरात का एक महत्वपूर्ण तीर्थ और पर्यटन स्थल है।

मंदिर का कई बार हो चुका है खंडन

बात करें अगर इस बेहद ही खास महत्व रखने वाले सोमनाथ मंदिर के इतिहास की तो आपको बता दें कि प्राचीन समय में इस मंदिर को कई मुस्लिम आक्रमणकारियों और पुर्तगालियों द्वारा बार-बार ध्वस्त करने के बाद वर्तमान हिंदू मंदिर का पुनर्निर्माण वास्तुकला की चालुक्य शैली में किया गया। सोमनाथ मंदिर के समृद्ध और अत्यंत वैभवशाली होने की वजह से इस मंदिर को कई बार मुस्लिम आक्रमणकारियों और पुर्तगालियों द्धारा तोड़ा गया मगर समय-समय पर कई बार इसका पुर्ननिर्माण भी होता रहा है। जबकि महमूद गजनवी द्धारा इस मंदिर पर आक्रमण करना इतिहास में सबसे ज्यादा चर्चित रहा है। बताया जाता है कि साल 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर में हमला किया था और उस दौरान उसने मंदिर की अथाह संपत्ति को भी लूटा और मंदिर का विनाश भी किया। सिर्फ इतने से ही उसका मन नहीं भरा था बल्कि उसने हजारों लोगों की जान भी ले ली थी।

आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर ये महमूद गजनवी था कौन जिसने इतना आतंक मचा रखा था तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गजनवी यमीनी वंश के तुर्क सरदार और गजनी के शासक सबुक्तगीन का बेटा था। सुल्तान महमूद का जन्म 971ई॰ में हुआ था। उसने 27 साल की उम्र में ही गद्दी संभाली थी। वह बचपन से भारत की दौलत के बारे में सुनता आया था और सत्ता में आते ही उसने अपनी बचपन की मंशा को पूरा करने के लिए 1001 से भारत पर आक्रमण करना शुरू कर दिया था और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उसने भारतवर्ष पर कुल 17 बार आक्रमण किया था। वह भारत की संपत्ति लूटकर ले जाना चाहता था।

हालांकि, गजनवी के आखिरी आक्रमण के बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और विनाश का सिलसिला काफी सालों तक जारी रहा। आठवीं सदी में सिंध के अरबी गवर्नर जुनायद ने इसे नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेजी। प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815ई॰ में इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण किया। इस तरह से मंदिर का कई बार खंडन हुआ और उसके बाद जीर्णोद्धार भी होता रहा। बताते चलें कि इस समय गुजरात जहां सोमनाथ मंदिर स्थित है, उसे भारत के पूर्व गृह मंत्री एवं लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया था। मान्यता है कि सोमनाथ भगवान की पूजा और उपासना करने से उपासक भक्त के क्षय तथा कोढ़ आदि रोग सर्वथा नष्ट हो जाते हैं और वह स्वस्थ हो जाता है।

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