Why is Kaliningrad Part of Russia: किसी भी देश में सभी शहर, सभी गांव एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं। सामूहिक रूप से ही ये एक देश कहलाते हैं, मगर क्या कभी आपने किसी ऐसे शहर के बारे में भी सुना है, जो कि अपने देश का हिस्सा तो है, लेकिन इसके बावजूद यह अपने देश में नहीं है। यह एक ऐसा शहर है जो अपने देश से पूरी तरह से कटा हुआ है। यहां तक कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भी इस शहर पर जर्मनी का कब्जा हुआ करता था। यहां हम आपको इसी शहर के बारे में बता रहे हैं, जो कि अपने देश से पूरी तरह से अलग जरूर है, मगर फिर भी यह अपने देश का हिस्सा बना हुआ है।

दो देशों के बीच में स्थित

इस शहर का नाम है कैलिनीनग्राद। यह एक ऐसा शहर है जो रूस के शहर के नाम से तो जाना जाता है, लेकिन रूस से यह बहुत दूर स्थित है। इस शहर में करीब चार लाख लोग निवास करते हैं। यह दरअसल लिथुआनिया और पोलैंड नामक दो देशों के बीच में बसा हुआ शहर है। फिर भी इस शहर में जाने के लिए रूस के वीजा की आवश्यकता पड़ती है। रूस का शहर यह भले ही है, लेकिन इस शहर में यहां के लोगों को जाने के लिए दूसरे देशों की सीमा को पार करना पड़ता है। इस तरह से यह रूस का एक ऐसा शहर है, जहां यदि रूस के लोग जाते हैं तो उन्हें सबसे पहले इसके लिए दूसरे देश में जाना पड़ता है और इसके बाद ही वे अपने देश में पहुंच सकते हैं।

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इन्होंने कर लिया कब्जा

प्रीगोलिया नदी बाल्टिक सागर में जिस जगह पर गिरती है, बिल्कुल उसी मुहाने पर कैलिनीनग्राद शहर बसा हुआ है। यह शहर मध्य युग में पुराने प्रशिया के तवांगस्ते नाम के कस्बे के तौर पर जाना जाता था। प्रशिया दरअसल उत्तरी यूरोप में स्थित एक ऐतिहासिक जर्मन राज्य था। बताया जाता है कि 18वीं और 19वीं शताब्दी में यह राज्य बहुत फल-फूल रहा था। उस वक्त इसकी उन्नति अपने चरम पर थी। राज्य की ख्याति चारों ओर फैली हुई थी और यह बेहद समृद्ध माना जाता था। साथ ही यह राज्य बहुत ही ताकतवर भी हुआ करता था। हालांकि, इसके बाद कई कारणों से इस राज्य का अस्तित्व ही धीरे-धीरे खत्म होता चला गया। इसके अधिकतर हिस्से पर कम्युनिस्ट पूर्वी जर्मनी, रूस और पोलैंड ने अपना कब्जा जमा लिया।

पलायन को हुए मजबूर

वर्ष 1255 में उत्तरी क्रुसेड्स के समय कैलिनीनग्राद शहर में टीटोनिक नाइट्स ने एक किले का निर्माण करवाया था। इस किले के अवशेष आज भी देखने को मिल जाते हैं। वर्ष 1944 में ब्रिटिश सेना द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इस शहर पर खूब बम बरसाए गए। इस तरह से यह शहर पूरी तरह से तबाह हो गया। यहां हर ओर विनाश-ही-विनाश नजर आ रहा था। इसके बाद वर्ष 1945 में यह एक रूस का शहर बन गया। यहां जो जर्मन लोगों की आबादी थी, वह यहां से पलायन करने पर मजबूर हो गई। उन्हें जबरदस्ती यहां से भगाया गया। इस तरह से अब यहां जितने लोग रहते हैं, उनमें से 27 प्रतिशत आबादी रूसी मूल के लोगों की है।

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बना है विशेष कार्ड

रूस की मुख्य भूमि से यह शहर कटा हुआ है। लिथुआनिया और पोलैंड के बीच में इसके स्थित होने की वजह से यहां रहने वालों को अपने देश में जाने के लिए इन देशों से होकर ही जाना पड़ता है। यही वजह है कि पोलैंड और रूसी संघ के बीच एक समझौता हो रखा है। इस समझौते के अनुसार यहां के निवासियों के लिए एक विशेष कार्ड बनवाया गया है। इसी कार्ड के जरिए यहां के निवासी पोलैंड के शहरों से होते हुए बिना किसी रोक-टोक के अपने देश यानी कि रूस में बार-बार आ-जा सकते हैं।

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