Anuradha Paudwal Biography in Hindi: ना सिर्फ फिल्मों में बल्कि इसके बाहर भी भगवान के भजन और भक्ति गाने आदि आपने खूब सुने होंगे। ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता ये वाला भजन तो शायद हम सभी ने कई बार सुना होगा। यहां पर कई बार इसलिए कहा गया क्योंकि यह इतनी मधुर आवाज में गाया गया है कि इसे एक बार सुनने के बाद-बार सुनने का मन करता है। आपको बता दें कि ये सभी भजन और आरती मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल ने गाया है और उन्हें उनकी मधुर वाणी के लिए बहुत ही सराहना मिली है।

27 अक्टूबर, 1954 को करवार, बॉम्बे राज्य (अब कर्नाटक) में जन्मी अनुराधा पौडवाल हिन्दी सिनेमा की एक प्रमुख पार्श्वगायिका हैं। अनुराधा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत फ़िल्म अभिमान से की थी, जिसमें उन्होंने जया भादुड़ी के लिए एक श्लोक गाया था। यह श्लोक उन्होंने संगीतकार सचिन देव वर्मन के निर्देशन में गाया था। इसके बाद साल 1976 में फिल्म कालीचरण में भी उन्होंने काम किया पर एकल गाने की शुरूआत उन्होंने फिल्म आप बीती से की। इस फिल्म का संगीत लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल ने दिया जिनके साथ अनुराधा ने और भी कई प्रसिद्ध गाने गाए।

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बेहद खास हुई थी करियर की शुरुवात

बता दें कि अनुराधा पौडवाल 1990 के दशक से आज तक यानी कि 2019 तक बहुत ही प्रसिद्ध गायिका रही हैं। उस दौरान अनुराधा जी के गानों से 1990 की सारी फिल्में हिट रही हैं। उनकी प्रसिद्धि इतनी ज्यादा थी कि आज भी उनके गानों को बड़े ही आनंद के साथ सुना जाता है और सबसे खास बात तो यह है कि उनके गानों को हर वर्ग के लोग सुनना पसंद करते हैं। अनुराधा पौडवाल नब्बे के दशक में अपने करियर के शिखर पर थीं। अनुराधा पौडवाल के करियर की बहुत ही अच्छी शुरुआत हुई थी जिसकी वजह से उन्होंने दुनिया भर में नाम कमा लिया था। उन्होंने काफी साल फिल्मों में गाने के बाद टी- सीरीज के साथ मिलकर काम करना शुरू किया।

फिल्म लाल दुपट्टा मलमल का आशिकी तेजाब और दिल है की मानता नहीं जैसी सुपरहिट फिल्मों के गानों ने अनुराधा पौडवाल को टी-सीरीज कंपनी का नया चेहरा बना दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह रही कि तमाम ऊंचाई और जिंदगी की गहराई देखने के बाद भी अनुराधा पौडवाल ने गायिकी से कभी मुंह नहीं मोड़ा। आज भी इनकी आवाज में भजनों को सुन मन शांत होता है। बताया जाता है कि अनुराधा पौडवाल के लिए लता मंगेशकर किसी भगवान से कम नहीं है क्योंकि वह अपनी सभी सफलताओं का श्रेय लता जी को ही देती हैं।

उनका कहना है कि “मैंने कई गुरुओं के सानिध्य में संगीत सीखा मगर लता जी की आवाज़ मेरे लिए एक प्रेरणा स्त्रोत थी। जिसने एक संस्थान के रूप में मेरा मार्गदर्शन किया।” अनुराधा जी बताती हैं कि संगीत के प्रति उनका लगाव लता जी के गीत से हुआ था जिसे उन्होंने सबसे पहले रेडियो पर सुना था। असल में जब वह चौथी कक्षा में थीं, उस दौरान निमोनिया की बीमारी से ग्रस्त हो गई थीं। उस समय उन्होंने लगभग पूरी तरह से अपनी आवाज़ को खो दिया था और 40 दिनों तक बिस्तर पर रही थीं। उन 40 दिनों में उन्होंने सिर्फ एक आवाज सुनी थी और वह थी लता जी की सुरीली आवाज। वह खुद इस बात को बताती हैं कि इसके बाद उन्होंने सपने में लता जी की आवाज़ को लाइव सुना था। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में उनके चाचा ने उन्हें लता जी की आवाज़ में भगवत गीता की रिकॉर्डिंग भेंट की थी जिसे सुनते हुए आश्चर्यजनक रूप से उनकी सेहत में काफी सुधार हुआ और वह ठीक हो गईं।

पति की मौत

अनुराधा पौडवाल के शिखर पर पहुंचने के बाद उनके पति अरुण पौडवाल की एक दुर्घटना के हो जाने से मृत्यु हो गई थी। अनुराधा पौडवाल का छोटा सा परिवार है जिसमें उनका बेटा आदित्य पौडवाल और बेटी कविता पौडवाल है। एक समय था जब लगभग हर फिल्म में अनुराधा का गाना हुआ करता था, लेकिन पिछले कई वर्षों से अनुराधा पौडवाल गायन से दूर हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आखिरी बार उन्होंने 2006 में आई फिल्म “जाने होगा क्या” में गाना गाया था।

अनुराधा पौडवाल के पुरस्कार और सम्मान

अपनी मधुर आवाज और भक्ति गीत तथा भजन आदि से हर किसी के दिल में जगह बनाने वाली अनुराधा पौडवाल को कई सारे सम्मान और पुरस्कारों से भी नवाजा गया है। साल 1986 में “मेरे मन बाजे मृदंग” के लिए सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर (महिला) के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवॉर्ड मिल चुका है।

इसके अलावा वर्ष 1991 में आशिक़ी फिल्म के सुपरहिट गाने नजर के सामने फिल्म दिल है की मानता नहीं के टाइटल गाने दिल है की मानता नहीं और 1993 में ‘बेटा’ के गाने “धक-धक करने लगा के लिए अनुराधा को सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर (महिला) के लिए दो फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिले हैं। 2004 मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महाकाल पुरस्कार से भी इन्हें सम्मानित किया जा चुका है और तो और 2010 में “लता मंगेशकर पुरस्कार" से भी इन्हें नवाजा जा चुका है। वैसे तो अवार्ड और सम्मान आदि की लिस्ट काफी लंबी है मगर आपको बता दें कि 2011 में मदर टेरेसा अवॉर्ड, 2016 में डी लिट की उपाधि और इसके बाद साल 2017 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से अनुराधा पौडवाल को सम्मानित किया जा चुका है।

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