बुधवार की सुबह कांग्रेस नेता अहमद पटेल(Ahmed Patel) का कोरोना वायरस से एक लंबी जंग के बाद निधन हो गया। 71 साल के अहमद पटेल की जिंदगी का सबसे लंबा पहलू कांग्रेस पार्टी रही।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल(Ahmed Patel) का कोरोना वायरस(Coronavirus) के चलते, बुधवार तड़के निधन हो गया। इस बात की जानकारी उनके बेटे फैजल पटेल ने दी। अहमद पटेल की राजनीतिक जिंदगी की लकीर इंदिरा गांधी से होते हुए राहुल गांधी-प्रियंका गांधी के दौर तक रही। इस बीच बहुत से उतार-चढ़ाव आए, लेकिन बदलते हालातों के बीच अहमद पटेल ने गांधी परिवार का कभी साथ नहीं छोड़ा।

सान 1949 में, 21 अगस्त को गुजरात के भरूच जिले की अंकलेश्वर तहसील के पिरामण गांव में जन्मे अहमद पटेल(Ahmed Patel) को सियासी बिसात का विद्वान कहा जाता था। वे तीन बार लोकसभा सांसद और चार बार राज्यसभा सांसद रहे थे। 1977 में उन्होंने अपना पहला चुनाव, भरूच लोकसभा सीट से लड़ा था। इस चुनावी मुकाबले में अहमद पटेल ने 62,879 मतों से जीत का परचम लहराया था।

26 साल उम्र में बने सांसद

अहमद पटेल(Ahmed Patel) 1977 में चुनाव जीतकर सबसे पहले युवा सांसद बने थे। उस दौरान वे केवल 26 साल के थे। इस चुनाव के बाद उनकी जीत का अंतर लगातार बढ़ता रहा। 1980 में अहमद पटेल ने यहीं से 82,844 वोटों से जीत हासिल की, जब कि 1984 में मतों का आंकड़ा 1,23,069 रहा। बात की जाए 1980 और 1984 की तो जनता पार्टी के चंदूभाई देशमुख दूसरे पर रहे।

संगठन की नब्ज जानते थे अहमद पटेल

अहमद पटेल ने कांग्रेस के संगठन में बहुत गहरी पैठ बनाई थी। 1980 में इंदिरा गांधी, कांग्रेस की जबरदस्त वापसी के बाद पटेल को कैबिनेट में शामिल करना चाहती थीं, लेकिन अहमद पटेल ने अपना मोह संगठन की तरफ बनाए रखा। यही सिलसिला राजीव गांधी(Rajiv Gandhi) के समय में भी दिखाई दिया। 1984 के चुनाव के बाद अहमद पटेल(Ahmed Patel) को फिर से मंत्री पद की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इस बार भी संगठन को ही अहमियत दी।

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