मंजिल उन्ही को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है  जी हां….और ये लाइने पूरी तरह से फिट बैठती हैं प्रांजल पाटिल (Pranjal Patil) पर। जिन्हे देश की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस अफसर(First IAS Blind Officer in India) होने का गौरव प्राप्त हुआ है। प्रांजल पाटिल ने फिलहाल तिरुवनंतपुरम में बतौर सब इंस्पेक्टर कार्यभार संभाल लिया है लेकिन प्रांजल पाटिल का यहां तक का सफर कितना मुश्किल रहा होगा इसका हम केवल अंदाज़ा ही लगा सकते हैं। कमज़ोर दृष्टि के साथ जन्मी प्रांजल की आंखों की रौशनी 6 साल की उम्र में पूरी तरह से चली गई। इतनी छोटी सी उम्र में आंखे खो देना किसी का भी हौसला तोड़ कर रख सकता है लेकिन प्रांजल नहीं टूटी। हिम्मत न हारने वाली प्रांजल के भीतर गजब का जज्बा था इसलिए प्रांजल ने अपनी कमज़ोरी को कभी आड़े नहीं आने दिया।

पहली कोशिश में ही हासिल की रैंक [First IAS Blind Officer in India]

आंखे खो देने के बाद प्रांजल की शुरूआती पढ़ाई मुबंई के दादर में स्थित श्रीमती कमला मेहता स्कूल से हुई। ये स्कूल प्रांजल जैसे खास बच्चों के लिए ही था, जहां ब्रेल लिपि से पढ़ाई होती थी। इस स्कूल में प्रांजल ने 10वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद प्रांजल ने चंदाबाई कॉलेज में एडमिशन लिया जहां से उन्होने आर्ट्स में 12वीं की, 12वीं में प्रांजल के 85 फीसदी अंक प्राप्त किए। 12वीं करने के बाद प्रांजल बीए की पढ़ाई के लिए सेंट जेवियर कॉलेज पहुंची। बीए के बाद प्रांजल ने दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawahar Lal Nehru) से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय पर परास्नातक किया। फिर पीएचडी और एमफिल कमप्लीट किया।

साल 2016 में प्रांजल ने संघ लोक सेवा आयोग यानि यूपीएससी(UPSC) की परीक्षा दी जिसमें उन्होने 773वीं रैंक हासिल की। तब उन्हें भारतीय रेलवे खाता सेवा में नौकरी का प्रस्ताव तो मिला लेकिन नेत्रहीन होने के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिली। लेकिन फिर भी निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया प्रांजल ने। अगले ही साल यानि 2017 में प्रांजल ने 124वीं रैंक हासिल की।

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