(State Election Commission) ‘नोटा’ (None Of The Above) चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों में से कोई भी पसंद नहीं। अगर मतदाता चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से किसी को भी अपना मत नहीं देना चाहता तो वह ‘नोटा’ पर बटन दबा सकता है।

चुनाव आयोग का फैसला नोटा भी उम्मीदवार होगा (State Election Commission)

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New Indian Expressहरियाणा के निकाय चुनावों में ‘नोटा’ (None Of The Above) पहली बार ‘फिकशनल इलेक्ट्रल कैंडीडेट’ होगा। राज्य चुनाव आयोग ने नोटा को भी उम्मीदवार घोषित कर दिया है। अगर किसी वार्ड के चुनाव परिणाम में सभी उम्मीदवारों के मत ‘नोटा’ के मतों से कम निकले तो चुनाव रद्द किया जाएगा। नए सिरे से फिर से चुनाव होगा, जिसमें पहले चुनाव लड़ चुके उम्मीदवार दोबारा अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं कर सकेंगे।

राज्य चुनाव आयुक्त डॉ. दलीप सिंह ने बताया कि देश के इतिहास में पहली बार हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने अपनी तरह का यह निर्णय लिया है। अगर किसी उम्मीदवार के मत ‘नोटा’ के मतों के समान आए तो वह उम्मीदवार विजयी घोषित किया जाएगा। यही नियम सीधे तौर पर होने वाले मेयर के चुनाव में भी लागू होगा।

डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि दोबारा हुए चुनाव में अगर फिर से ‘नोटा’ के मत सभी उम्मीदवारों से अधिक आए तो फिर चुनाव रद्द नहीं किया जाएगा, बल्कि वह उम्मीदवार चयनित माना जाएगा जिसके मत नोटा से कम यानी दूसरे नंबर पर होंगे। अभी तक नोटा को बतौर उम्मीदवार मानने का प्रावधान नहीं था। राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को लागू करते हुए यह फैसला लिया है।

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दलीप सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नोटा को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हुए हैं। हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने इससे आगे बढ़ते हुए नोटा को उम्मीदवार ही घोषित कर दिया है। राज्य चुनाव आयोग की 2016 की अधिसूचना में संशोधन कर नोटा को उम्मीदवार बनाया गया है। इससे राजनीतिक दलों पर अच्छे उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारने का दबाव रहेगा।

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