इंसानियत, इंसानियत, इंसानियत। अक्सर चर्चा में, अक्सर भाषणों में, अक्सर अखबारों के आर्टिकल्स में यह शब्द सुनने को मिल जाता है। इस इंसानियत को लोग कितना आखिर को मानते हैं? लोग कितना इस इंसानियत का महत्व समझते हैं? यह एक बड़ा सवाल है। कहते हैं कि इंसानियत से बड़ा इस दुनिया में कोई धर्म नहीं, लेकिन आजकल लोग यह भी कहते हैं कि इंसानियत अब लोगों के बीच से खत्म होती जा रही है। हालांकि, अब इस दुनिया में बहुत से लोग हैं जो इस इंसानियत के अस्तित्व को मिटने नहीं देना चाहते। अब भी समय-समय पर इंसानियत की मिसाल पेश करने वाले लोग हमारे सामने आते रहते हैं। विशेषकर सोशल मीडिया ऐसे लोगों को जरूर उभारता है और इसी सोशल मीडिया के जरिए ऐसे लोगों की इंसानियत को हम सलाम करते हैं।

प्रेरणादायक कदम

झारखंड में भी लोगों ने इंसानियत की एक ऐसी ही बड़ी मिसाल पेश की है। यह घटना यहां के गुमला जिले के बनटोली गांव की है। घटना वैसे कुछ दिनों पुरानी है, लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों यह बड़ी सुर्खियां बटोर रही है। लोग इसकी खूब तारीफ कर रहे हैं। इसे शेयर भी कर रहे हैं। तो आइए हम आपको बताते हैं इस घटना के बारे में ताकि इसे जानकर आप भी इससे प्रेरणा ले पाएं।

कुएं में गिरा नन्हा हाथी

forest department rescue elephant calf by archimedes principle

दरअसल हुआ यह कि गुमला के बनटोली में एक हाथी का बच्चा गुजर रहा था। तभी यह एक कुएं में फिसल कर जा गिरा। हाथी का बच्चा बड़ा व्याकुल हो रहा था। कुएं से बाहर निकलने के लिए वह लगातार चिंघाड़ मार रहा था। तभी यहां के लोगों की नजर इस हाथी के बच्चे पर पड़ी। लोगों ने अब किसी तरह इस बच्चे को कुएं से निकालने की ठान ली। हाथी के बच्चे को कुएं से बाहर निकलने के लिए लोगों ने तरह-तरह की योजना बनानी शुरू कर दी। आखिरकार इन लोगों ने एक ऐसा तरीका अपनाया, जिसकी हममें से कोई सामान्यतः कल्पना भी नहीं कर सकता। जी हां, यहां के लोगों ने आर्कमिडीज के सिद्धांत को अपनाया। इसी का अनुसरण करते हुए उन्होंने सुरक्षित तरीके से हाथी के इस बच्चे को कुएं से बाहर निकालने में सफलता भी पा ली। सोशल मीडिया पर यहां के लोगों की इसके लिए खूब तारीफ की जा रही है।

आर्कमिडीज का सिद्धांत

नन्हे हाथी का वजन ज्यादा था। आखिर इस बच्चे को फिर कैसे बाहर निकाल पाते? रस्सी से संभव नहीं हो पा रहा था इस नन्हे हाथी को बाहर निकालना। आखिरकार यहां के लोगों ने आर्किमिडीज के सिद्धांत का पालन किया और इसी के जरिए उन्होंने हाथी के बच्चे को कुएं से बाहर निकाल लिया। दरअसल आर्कमिडीज का सिद्धांत यह कहता है कि किसी चीज को यदि आपको हल्का करना है तो उसे आप द्रव में पूरी तरह से या फिर आंशिक तरीके से डुबो दीजिए। इससे उसके वजन में कमी आ जाती है। बस फिर क्या था, लोगों को इस नन्हे हाथी को कुएं से बाहर निकालने का तरीका मिल गया। उन्होंने तुरंत कुएं में पानी भरना शुरू कर दिया, ताकि बच्चे को बाहर निकाल सकें।

निकाल लिया बच्चे को बाहर

इसके बाद जैसे-जैसे यहां कुएं में पानी भरता चला गया, वैसे-वैसे हाथी का यह नन्हा बच्चा धीरे-धीरे ऊपर की तरफ आने लगा। लोगों ने तुरंत यहां जेसीबी मशीन को भी बुलवा लिया, ताकि हाथी के बच्चे को निकालने में किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो। जेसीबी मशीन ने यहां कुएं के चारों ओर बनी दीवार को तोड़ दिया। साथ ही थोड़ी सी यहां खुदाई भी कर दी, ताकि इस पर पकड़ बनाते हुए हाथी का यह बच्चा आसानी से इस कुएं से बाहर निकल आए। कुछ घंटों की मेहनत इसमें जरूर लगी, लेकिन इसका नतीजा यह हुआ कि हाथी का यह बच्चा सुरक्षित तरीके से कुएं से बाहर आ गया। इसके बाद यह जंगल में अपने परिवार से मिलने के लिए चला गया। यहां स्थानीय लोगों ने इस घटना का एक वीडियो भी अपने कैमरे में बना लिया था, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिया। देखते-ही-देखते सोशल मीडिया में यह वीडियो तेजी से वायरल होता चला गया, क्योंकि इस वीडियो में कुछ बड़ा ही दिलचस्प और प्रेरणादाई देखने को लोगों को मिल रहा था।

हर ओर तारीफ

सोशल मीडिया पर आमजनों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक ने गांव वालों के इस काम की बहुत तारीफ की है। कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने इसके समान ही अपने भी अनुभवों को यहां पर शेयर किया है। सभी लोग गांव वालों के इस तरकीब की जमकर सराहना कर रहे हैं। वाकई गांव वालों का यह कदम प्रेरणा देने वाला है कि जो चीजें हम पढ़ते हैं, उन्हें व्यवहार में लाना भी हमें सीखना चाहिए।

Facebook Comments