भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है  यहां की प्रतिभा का लोहा तो दुनिया मान चुकी है। दुनियाभर में भारतीयों ने अपनी प्रतिभा की वजह से विशेष पहचान बनाई है। इसी तरह का एक और टैलेंट उभर कर सामने आया है। 22 साल के एक लड़के ने भारत का नाम एक बार फिर से दुनियाभर में रोशन कर दिया है। अपने इन्नोवेटिव आइडिया की वजह से इनका काम दुनिया में छा गया है।

मामूली नहीं ये ड्रोन

कर्नाटक के एनएम प्रताप ने एक ऐसा ड्रोन बनाया है, जिसे देखकर दुनिया हैरान रह गई है। जी हां, यह कोई मामूली ड्रोन नहीं है। वह इसलिए कि इसे बनाने के लिए एनएम प्रताप ने ई-कचरे का इस्तेमाल किया है। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी ने ई-कचरे को प्रयोग में लाते हुए एक ड्रोन ही तैयार कर दिखाया है।

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किसी मिसाल से कम नहीं

प्रताप का कहना है कि पहली बार उन्होंने ड्रोन को तब देखा था, जब उनकी उम्र 14 वर्ष की थी। तभी से उन्होंने न केवल ड्रोन को चलाना शुरू किया, बल्कि वे उसे खोल देते थे और उसकी रिपेयरिंग तक खुद से करते थे। इस तरह से उनका अभ्यास चलता रहा। इस अभ्यास का नतीजा यह हुआ कि वे नई-नई चीजें सीखते चले गए। जब वे 16 साल की उम्र में पहुंचे, तब उन्होंने पहला ड्रोन भी विकसित कर लिया, जो कि उड़ भी सकता था। इस ड्रोन की खासियत यह थी कि फोटो ले पाने में भी यह पूरी तरह से सक्षम था। प्रताप की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने कबाड़ से इस ड्रोन को विकसित किया था, जो कि अपने-आप में किसी मिसाल से कम नहीं है।

मिला अल्बर्ट आइंस्टीन मेडल

परिवार से प्रताप बहुत समृद्ध नहीं हैं। वे एक किसान परिवार से नाता रखते हैं। ऐसे में ड्रोन बनाने के लिए उनका नए सामान खरीद पाना मुमकिन नहीं था। यही वजह थी कि उन्होंने ड्रोन को पुराने ई-कचरे की मदद से ही बनाना शुरू कर दिया। आखिरकार उन्हें इसमें कामयाबी भी मिली और जब वर्ष 2018 में जर्मनी में इंटरनेशनल ड्रोन एक्सपो का आयोजन हुआ तो इसमें एनएम प्रताप का यह ड्रोन छा गया। उन्हें इस एक्सपो में अल्बर्ट आइंस्टीन गोल्ड मेडल देकर सम्मानित भी किया गया।

IIT और IISc में दे रहे लेक्चर

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एन एम प्रताप की उम्र भले ही वर्तमान में महज 22 वर्ष की है, लेकिन वे आईआईटी बॉम्बे के साथ भारतीय विज्ञान संस्थान यानी कि IISc बेंगलुरु में भी लेक्चर दे चुके हैं। अपने ज्ञान की वजह से उन्हें अलग-अलग प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी कि DRDO में वे एक प्रोजेक्ट पर भी इस वक्त काम कर रहे हैं। बीते दिनों जब कर्नाटक में बाढ़ आई थी, तब भी प्रताप के ड्रोन ने यहां राहत कार्य में काफी मदद की थी। इस ड्रोन की सहायता से राहत व बचाव कार्य में लोगों को मदद पहुंचाने में आसानी हुई थी।

ये रहती है कोशिश

प्रताप जब ड्रोन बनाते हैं तो उनकी सबसे पहली कोशिश यही रहती है कि इसे बनाने में लागत कम से कम आए। साथ ही वे यह भी कोशिश करते हैं कि इस दौरान ई-कचरा कम ही निकले। विशेष तौर से वे पुराने मोटर, कैपिसिटर और ड्रोन आदि का प्रयोग ड्रोन बनाने के लिए करते हैं।

600 से भी अधिक ड्रोन

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अब तक है एन एम प्रताप द्वारा 600 से भी अधिक ड्रोन बनाए जा चुके हैं। प्रताप के मुताबिक उन्होंने कहीं और से नहीं, बल्कि खुद से ही इन्हें बनाना सीखा है। प्रताप का कहना है कि आपके अंदर जब कोई जुनून पैदा हो जाता है तो उसे आपको भड़का कर ही रखना चाहिए। निश्चित तौर पर धीरे-धीरे दुनिया के सामने यह उभरकर आना शुरू हो ही जाएगा। एनएम प्रताप की यह उपलब्धि न केवल यह संदेश देती है कि आपको अपने टैलेंट को हर हाल में पोषित करना चाहिए, बल्कि साथ में इससे यह संदेश भी मिलता है कि आपके आसपास जो कचरा मौजूद है, उनसे भी कुछ सकारात्मक विकसित करने की आपकी कोशिश होनी चाहिए।

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