Pitra Paksh me Janme Log: हमारा हिन्दू धर्म भी कई विविधताओं से भरा हुआ है। साल के सभी 12 मास के दौरान कई ऐसे मौके और तिथियां आती हैं जब कोई ना कोई व्रत, त्यौहार या फिर कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथा विशेष बातें होती हैं जो हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। बता दें कि हमारे प्राचीन लोगों ने हमारे संपूर्ण जीवन चक्र को सोलह संस्कारों के माध्यम से बांधकर हमें शास्त्रों के अनुसार सभी संस्कारों को विधि-विधान के साथ करने की शिक्षा दी है। जीवन के ये सभी संस्कार गर्भाधान से आरंभ होकर अंत्येष्टि कर्म के साथ संपन्न किए जाते हैं। मान्यता के अनुसार किसी भी मनुष्य के जन्म लेने के साथ ही वह तीन प्रकार के ऋणों से युक्त हो जाता है देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। माना जाता है कि जो व्यक्ति इन तीनों ऋणों को नहीं उतारता है, उसे अनेक प्रकार के दुखों और संतापों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में देव ऋण सभी देवों के पूजा-अर्चना कर के उतारा जा सकता है। ऋषि ऋण को वेदों और शास्त्रों का प्रचार व प्रसार करके उतारा जा सकता है और इनमें से तीसरा जो ऋण है उसे पितृ पक्ष में उतारने का अवसर हमारे शास्त्र देते हैं।

पितृ पक्ष का महत्त्व

असल में आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पितृपक्ष अपने पितरों के प्रति सम्मान व श्रद्धा अर्पित करने का एक अवसर होता है। यह तिथि हर वर्ष भाद्रपद की पूर्णिमा से लेकर आश्विन के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक यानी कि पूरे 15 दिनों तक मनाया जाता है और इस अवधि में पितृपक्ष के सभी शास्त्रोक्त कर्म संपन्न किये जाते हैं। इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध का अनुष्ठान करवाने वाले ब्राह्मण को श्राद्ध आदि के बाद भोजन व यथोचित दक्षिणा देकर आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए।

पितृ पक्ष में जन्मे लोग

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इस संसार में कोई भी व्यक्ति हो उसके जन्म का समय उसके स्वभाव और करियर को लेकर कई सारे बातों को उजागर करता है। ज्योतिष शास्त्र ऐसा विज्ञान है जो व्यक्ति के जन्म लेने की तिथि, पक्ष, आदि के आधार पर भी उसका स्वभाव बता देता है। हर व्यक्ति पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है क्योंकि व्यक्ति के जन्म लेने के समय ब्रह्मांड में जो ग्रह विद्यमान होता है, उसका प्रभाव जन्म लेने वाले व्यक्ति पर जरूर पड़ता है। हर दिन का स्‍वामी अलग है, इसलिए उसका प्रभाव भी अलग होता है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे उन लोगों के बारे में जिनका जन्म पितृ पक्ष के दौरान हुआ है।

आमतौर पर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि पितृ पक्ष में यदि कोई बच्चा जन्म लेता है तो क्या वह अशुभ होता है क्योंकि सामान्यतः पितृ पक्ष के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता क्योंकि शास्त्रों और नक्षत्रों के अनुसार यह समय अच्छा नहीं माना जाता। तो आपकी इस शंका को दूर करते हुए बता दें कि पितृ पक्ष में जन्म लेना किसी भी तरह से अशुभ नहीं होता है, यहां पर ध्यान देने वाली बात तो ये होती है कि इस दौरान जन्म लेने वाले बच्चे पर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद बना रहता है जिनका हम श्राद्ध कर रहे होते हैं। आप खुद इस बात को सोच सकते हैं कि हमारे पूर्वज जो अपने जीवनकाल में हमेशा से हमारा भला कहते थे वो भला इस श्राद्ध के दौरान जन्म लेने वाले जातक का बुरा कैसे कर सकते हैं।

पितृ पक्ष में जन्म लेने वाले लोगों के बारे में बताया जाता है कि वे बहुत ही ज्यादा सृजनात्मक प्रवृति के होते हैं और वे किसी विशेष उद्देश्य के साथ जन्म लेते हैं। इस बात को खुद उन्हें और उनके माता पिता को समझना चाहिए। आपको यह भी जान लेना चाहिये कि ना सिर्फ ज्योतिष नजरिये से बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार भी बताया गया है कि अमावस्या को जन्मे लोगों का चन्द्रमा कुछ कमजोर होता है मगर अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति की मदद से वो इसे मजबूत कर सकते हैं, साथ ही साथ अपने आत्मविश्वास को भी बढ़ा सकते हैं। इन सभी बातों से यही पता चलता है कि पितृ पक्ष में जन्म लेने वाले जातक किसी भी दृष्टिकोण से अशुभ नहीं होते हैं।

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