भारत की नई ‘पी टी उषा’ और ‘गोल्डन गर्ल’ के नाम से मशहूर हो रही एक छोटे से गांव की बेटी ने आज न सिर्फ अपने मां-बाप का बल्कि अपने कस्बे और पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। जी हां, आपने बिलकुल ठीक समझा। हम बात कर रहे हैं हिमा दास की जिन्होंने अभी हाल ही में एक, दो नहीं बल्कि पूरे 5 स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। हिमा ने यह कारनामा 19 वर्ष की उम्र में वर्ल्ड अंडर 20 चैंपियनशिप में कर दिखाया है।

असम के धींग गांव में जन्मी हिमा अपने क्षेत्र में धींग एक्सप्रेस के नाम से भी मशहूर हैं। बेहद ही सामान्य या आप कह सकते हैं कि एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली हिमा का बचपन से ही खेल के प्रति काफी झुकाव था। अपने स्कूल के दिनों से ही वह तरह-तरह के खेलों में हिस्सा लेती थीं और तो और लड़कों के साथ फुटबॉल भी खेला करती थीं। इससे उनका स्टैमिना काफी बढ़ा और दौड़ने के बाद वह थकती भी नहीं थीं।

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हिमा की इसी खासियत को देखकर नवोदय विद्यालय के फिजिकल एजुकेशन के एक शिक्षक ने उन्हें धावक बनाने की सलाह दी। फिर क्या था! शुरू हो गया हिमा का धावक बनने का सफर और लग गईं रेसिंग में अपना ध्यान लगाने। हालांकि, गांव में रेस लगाने के लिए कोई बेहतर रेसिंग ट्रैक की सुविधा नहीं थी, जिस वजह से हिमा को काफी दिक्कतें उठानी पड़ी मगर उन्होंने इसकी परवाह न करते हुए फुटबॉल के मैदान को ही अपना ट्रैक बना लिया था।

वर्ष 2017 में जब इंटर-डिस्ट्रिक्ट कम्पटीशन में हिमा हिस्सा लेने पहुंची तो उस दौरान उनकी मुलाक़ात कोच निपुण दास से हुई। इस रेस में हिमा ने जिस बेहतरीन गति से दौड़ लगाई और प्रथम स्थान हासिल किया उसे देख हर कोई हैरान रह गया। खास बात तो यह थी कि हिमा दास ने ये कारनामा नाइक या रीबोक जैसे महेंगे और ब्रांडेड जूते पहनकर नहीं बल्कि बेहद ही सस्ते जूते पहनकर दिखाया था। उनकी इस अविश्वसनीय जीत से हर कोई प्रभावित हुआ था।

हिमा के शानदार प्रदर्शन को देखकर कोच निपुण दास ने उन्हें ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया और उन्हें अपने साथ गुवाहटी ले आये। यहां उन्होंने हिमा दास के रहने, खाने और बाकी सभी खर्चों की जिम्मेदारी उठाई। कोच निपुण दास ने हिमा को पहले 200 मीटर रेस की तैयारी कराई। फिर जब लगा कि वह इससे भी ज्यादा कर सकती हैं तो उन्होंने 400 मीटर रेस के लिए भी ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। हिमा ने भी पूरी मेहनत के साथ ट्रेनिंग की जिसका परिणाम भी बहुत ही जल्दी दिखने लगा।

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आपको बता दें कि बैंकॉक में हुई एशियाई यूथ चैंपियनशिप में भारत की हिमा दास ने 200 मीटर रेस में हिस्सा लिया था। हालांकि, इस रेस में वह सातवें स्थान पर रही थीं। मगर जल्दी ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत की तरफ से हिस्सा लिया। उस दौरान हिमा दास की उम्र मात्र 18 वर्ष थी। मगर हिमा इस बार भी कोई खास कमाल नहीं दिखा पाईं और 400 मीटर की रेस में वो चौथे स्थान पर रहीं। लेकिन हिमा का सफर यही नहीं रुका।

साल 2018 में हिमा ने विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप 2018 में 400 मीटर रेस में स्वर्ण पदक जीता। आपको बता दें कि हिमा दास किसी भी अंतर्राष्ट्रीय ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय धावक थीं। यह कारनामा उन्होंने मात्र 51.46 सेकंड में कर दिखाया था। इसके अलावा हिमा को वर्ष 2018 में ही हुए एशियाई खेलों के 4×400 मीटर मिश्रित रिले रेस में रजत पदक मिला, जो बाद में स्वर्ण में तब्दील हो गया था। 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में 4×400 मीटर स्पर्धाओं में भी हिमा को स्वर्ण पदक मिला था।

9 जनवरी 2000 को असम में जन्मी हिमा दास के नाम उनके कुछ व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी हैं जो कि अद्भुत हैं। हिमा ने 100 मीटर रेस 11.74 सेकंड, 200 मीटर रेस 23.10 सेकंड तथा 400 मीटर रेस को 50.79 सेकंड में पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया है। ये सभी रिकॉर्ड उन्होंने वर्ष 2018 में बनाये हैं। बात की जाए हिमा के हाल के रिकॉर्ड्स की जिसने अचानक से उन्हें इतना ज्यादा मशहूर बना दिया तो इसकी शुरुवात इसी वर्ष पोलैंड में आयोजित वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप से हुई। भारत की हिमा दास पॉज़्नान एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में 200 मीटर रेस में 23.65 सेकंड का समय लेते हुए स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा कुटनो एथलेटिक्स मीट में हिमा ने 200 मीटर रेस 23.97 सेकंड में पूरा करते हुए पहला स्थान और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

इसके कुछ ही दिन बाद चेक गणराज्य में कल्दनो एथलेटिक्स मीट में हिमा दास ने मात्र 23.43 सेकंड का समय लेते हुए 200 मीटर रेस में एक बार फिर से गोल्ड मेडल जीता। अपनी जीत का सिलसिला जारी रखते हुए हिमा ने ताबोर एथलेटिक्स मीट चेक रिपब्लिक में 200 मीटर की रेस पहले से भी कम समय लेते हुए 23.25 सेकंड में ही पूरा किया और फिर से स्वर्ण झटक ले गईं। लगातार 4-4 स्वर्ण पदक जीतकर अब तक हिमा दास भारत की आंखों का तारा बन चुकी थीं और तब तक एक बार फिर से हिमा ने कमाल दिखाते हुए नोव मेस्टो, चेक गणराज्य में हुए 400 मीटर की रेस में 52.09 सेकंड के समय में रेस जीतकर एक और स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाल लिया।

आपको यह जानकर भी काफी अच्छा लगेगा कि हिमा दास को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 2018 में अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा हिमा वर्ष 2018 में ही यूनिसेफ-इंडिया के लिए भारत की पहली ‘युवा राजदूत’ के रूप में नियुक्त की जा चुकीं हैं।

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