Jabalpur Mein Ghumne ki Jagah: मध्य प्रदेश का जाना-माना शहर जबलपुर, जो लोगों के बीच अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों और संगमरमरी चट्टानों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। बात करें जबलपुर के इतिहास की तो यह शहर गौंड राजाओं की राजधानी और कलचुरी वंश के राजाओं की कर्मभूमि रहा है। जबलपुर का नाम जाबुली नाम के ऋषि के ऊपर रखा गया है और यह शहर उनकी कर्मभूमि है। जबलपुर अपने इतिहास और प्राकृतिक खूबसूरती को लेकर के पूरी दुनिया में मशहूर है।

जबलपुर की राजसी पहाड़ियां और नदी-झरने यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं और सैलानियों को यहां पर आने के लिए मजबूर करते हैं। आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि जबलपुर में ऐसी कौन सी खास जगहें हैं जहां पर आप जाकर इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का आलौकिक दृश्य देख पाएंगे। इतिहास और प्रकृति के प्रेमियों के लिए यह घूमने के लिए एक खास जगह है।

डुमना नेचर रिजर्व

Dumna reserve
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डुमना नेचर पार्क जबलपुर में घूमने के लिए एक बेहतरीन स्थान है। यहां पर आपको हिरण, बंदर और चीतल के अलावा और भी कई अन्य तरह के पशु पक्षी देखने को मिल जाएंगे। बता दें कि यह एक पिकनिक स्पॉट हैं जिस वजह से यहां पर लोगों की भीड़ काफी ज्यादा संख्या में पहुंचती है।

भेड़ाघाट

Bhedaghat
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जबलपुर अपनी संगमरमरी चट्टानों के लिए जाना जाता है और भेड़ाघाट में ही यह संगमरमरी चट्टानें सबसे ज्यादा पाई जाती हैं। यहां पर पाए जाने वाले पत्थरों पर वहां के कारीगर नक्काशी कर के ही अपना जीवन यापन करते हैं। बता दें कि यह जगह विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है।

धुंआधार वाटर फॉल

Dhuandaar Water Fall
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नर्मदा नदी की तेज धारा जब पत्थरों पर गिरती है तो दूध की तरह सफेद एक झाग बन जाता है। यह पूरा नजारा देखने में बेहद ही खूबसूरत लगता है। इस वाटर फॉल को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहां पर हर समय लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। यहां पर सैलानी काफी ज्यादा संख्या में पहुंचते हैं।

शिव प्रतिमा

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जबलपुर में स्थित शिव जी की 76 फीट की प्रतिमा शहर के ज्यादातर ऊंचाई वाले स्थानों से नजर आती है। शिव जी इस प्रतिमा में ध्यान की मुद्रा में बैठे हुए हैं। शिव की इस भव्य प्रतिमा को देखने के लिए सैलानी दूर-दूर से आते हैं।

मदन महल किला

Madan mehal
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बता दें कि यह रानी दुर्गावती का किला है। बता दें कि इसे रानी दुर्गावती की छावनी भी कहा जाता था। यहां पर तोप के गोलों के निशान बने हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि रानी दुर्गावती यहां पर अपने घोड़े से छलांग लगाती थी जिसके निशान आज भी वहां बने हुए हैं, जहां पर रानी प्रतिदिन युद्ध का अभ्यास करती थीं।

बैलेंसिंग रॉक

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मदन महल में ही बैलेंसिग रॉक स्थित है। बता दें कि एक पत्थर के ऊपर दूसरा पत्थर एक छोटे से प्वाइंट पर टिका हुआ है। आपको जानकर हैरानी होगी कि भूकंप आने पर जहां बड़ी-बड़ी इमारतें धराशायी हो जाती हैं वहीं ये पत्थर अपनी जगह से टस से मस नहीं होता।

गुरूद्वारा साहेब द्वारीघाट

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नर्मदा नदी को पार करके दूसरे ओर जाने पर इस गुरूद्वारे में पहुंचते हैं। यहां सर्वधर्म संभव की छवि देखने को मिलती है। बता दें कि इस गुरूद्वारे के अंदर एक म्यूजियम भी स्थित है, जिसकी वजह से यह जगह लोगों के बीच काफी फेमस है।

जैन मंदिर हनुमान ताल

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बता दें कि यह मंदिर जबलपुर में स्थित एक बड़ा जैन मंदिर है। यह एक ऐतिहासिक मंदिर है। बता दें कि इस दार्शनिक स्थल पर हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं।

कान्हा राष्ट्रीय वन रिजर्व

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वैसे तो मध्य प्रदेश अपने पार्कों और जंगलों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यह भारत का प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही है। बता दें कि यहां पर मिलने वाली मिट्टी काफी चिकनी होती है, जिस वजह से इस जगह का नाम कान्हा पड़ा था। दरअसल, कान्हा शब्द कनहार से बना था जिस शब्द का स्थानीय भाषा में अर्थ चिकना होता है।

बता दें कि इसके अलावा भी जबलपुर में कई फोर्ट्स हैं जो लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध हैं। जबलपुर में आप विजयराघवगढ़ फोर्ट, देवगढ़ फोर्ट, चैरागढ़ फोर्ट, रानी दुर्गावती संग्रहालय, चौसठ योगिनी मंदिर और पिसनहारी की मडिया जैसे भी कई ऐसे स्थान हैं जहां पर आप घूम सकते हैं।

मध्य प्रदेश का ये पौराणिक शहर अपने आप में भारत के इतिहास को समेटे हुए है। साथ ही इसके बदलते मौसम इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। अगर आप इतिहास का जायका प्रकृति की खूबसूरती के बीच लेना चाहते हैं तो जबलपुर से ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह पाएंगे।

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