Kalidas Biography in Hindi: कालिदास भारत के महान कवि नाटककार और संस्कृत भाषा के विद्वानों में से एक है। उन्होंने अपने विचारों और जीवन में मिले ज्ञानो को ग्रंथ हो में उतारा है। कालिदास ने ना केवल भारत के पौराणिक कथाओं और दर्शन को आधार मानकर एक सुंदर सरल और अलंकार युक्त भाषा में अपनी रचनाएं प्रस्तुत की है, बल्कि इसके साथ-साथ उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारत को एक नई दिशा दिखाने की कोशिश भी की है।
कालिदास को साहित्य का जितना ज्ञान था उतना ज्ञान आज तक किसी कवि या लेखक में नहीं पाया गया है। साहित्य में कालिदास जी अब तक के महान अद्वितीय कवियों में से एक है। कालिदास की प्रस्तुति में संगीत और साहित्य का एक अलग ही मेल देखने को मिलता है। जिस तरीके से वह अपने लेख में ऋतु का वर्णन करते हैं। मानो साहित्य इंसान के मन में घर बना लेता है। आज भी उनके रचनाओं का जितना भी उल्लेख किया जाए,  जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है।
श्रृंगार रस की रचना करने के दौरान उन्होंने अपनी रचना में साहित्यिक सौंदर्य के साथ-साथ आशीर्वाद परंपरा एवं नैतिक मूल्यों का भी समुचित ध्यान रखा है। यही कारण है कि उनकी रचनाओं को पढ़ते वक्त भाव अपने आप ही जागृत हो जाते हैं।
Kalidas Biography in Hindi

कालिदास का प्रारंभिक जीवन

कालिदास की जीवनी से जुड़े उपन्यास एवं ग्रंथों में इस बात का जिक्र है कि कालिदास मां काली के परम उपासक थें। जिसके कारण उनका नाम कालिदास रखा गया, जिसका अर्थ होता है काली की सेवा करने वाला। ऐसा कहते हैं कि कालिदास अपनी रचनाओं के माध्यम से हर किसी को अपने वश में कर लेते थें। एक बार जो कालिदास की रचनाओं को पढ़ लेता था। वह उसमें डूब जाता था।
इसी तरह की कुछ उनकी वेशभूषा भी थी। कहते हैं कि कालिदास को अगर कोई एक बार देखता था। तो बस उसकी नजरें उन पर ही टिकी रहती थी। अलग ही तरह की छवि वाले अत्यंत मनमोहक, कालिदास का रूपरेखा बिल्कुल ही अलग था। राजा विक्रमादित्य के दरबार में नौ रत्नों में से एक थें कालीदास।

कालिदास के जन्म को लेकर विवाद

कालिदास का जन्म कब हुआ। इसके बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है अलग-अलग विद्वान उनके जन्म को लेकर अलग-अलग दावा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि 150 ईसा पूर्व से लेकर 450 ईसवी तक कालिदास पृथ्वी लोक पर रहे होंगे। एक अन्य रिसर्च में इस बात का दावा किया गया है कि कालिदास गुप्त काल में जन्मे होंगे। इसके पीछे यह तर्क है कि कालिदास में द्वित्तीय शुंग शासक  अग्निमित्र को नायक बनाकर एक नाटक लिखा। जिसका नाम है ‘मालविकाग्निमित्रम्’ और अग्निमित्र ने 170 ईसा पूर्व में शासन किया था। रिसर्च के मुताबिक यह दावा किया जाता है कि कालिदास का जन्म इसी युग में हुआ होगा।
महाकवि कालिदास के जन्म के समय के तरह उनके जन्म स्थान के बारे में भी कुछ स्पष्ट नहीं है। उन्होंने अपने खंडकाव्य मेघदूत में मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर का काफी वर्णन किया है। इसलिए कई इतिहासकार मानते हैं कि कालिदास उज्जैन के निवासी रहे होंगे।
वहीं कुछ साहित्यकारों की मानें तो कालिदास का जन्म उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिला के कविल्ठा गांव में हुआ था। यहां भारत सरकार के द्वारा कालिदास की एक प्रतिमा भी स्थापित की गई है। इसके साथ यहां एक सभागार का भी निर्माण करवाया गया है। सभागार में हर साल जून में 3 दिनों की एक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। जिसमें हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश से कई विद्वान पहुंचते हैं।

कालिदास का बचपन और उनका विवाह

कालिदास के बारे में कहा जाता है कि वह बचपन में अनपढ़ थे और उन्हें चीजों की समझ नहीं थी। लेकिन आगे चलकर अपनी पत्नी से अपमानित होने के बाद सामाजिक प्रताड़ना के कारण वह काफी विद्वान हो गए और उन्हें हिंदी साहित्य के महाकवि का दर्जा मिला।
इतिहास में इस बात का जिक्र है कि कालिदास की शादी संयोगवश राजकुमारी के विधोतमा से हो गई थी। राजकुमारी विधोतमा ने इस बात की प्रतिज्ञा ली थी कि जो भी उन्हें शास्त्रार्थ में हरा देगा। वह उसी से शादी करेंगी लेकिन जब शादी करने के लिए कोई भी विद्वान शास्त्रार्थ में विधोतमा को नहीं हरा पाया तब अपमान से दुखी होकर विद्वानों ने राजकुमारी विधोतमा से बदला लिया और छल वश कालिदास की शादी राजकुमारी विधोतमा से करवा दी।

कैसे हुई राजकुमार विधोतमा और कालिदास की शादी

शास्त्रार्थ की परीक्षा के दौरान राजकुमारी विधोतमा मौन शब्दावली में गुढ़ प्रश्न पूछती थी। इन्हीं प्रश्नों का जवाब कालिदास में अपने बुद्धि से मौन संकेतों में दे दिया। सबसे पहले राजकुमारी ने अपना हाथ खोलकर कालिदास को दिखाया। जिस पर कालिदास को लगा कि राजकुमारी उन्हें थप्पड़ मारने की बात कह रही है। इसके जवाब में कालिदास ने मुक्का दिखा दिया। यह देखकर राजकुमारी विधोतमा को लगा कि कालिदास कह रहे हैं कि पांचो इंद्रिय भले ही अलग-अलग हो लेकिन सभी एक ही मन के द्वारा संचालित होती हैं। जवाब से राजकुमारी प्रभावित हुई और उन्होंने उनसे विवाह कर लिया। लेकिन बाद में जब उन्हें इस बात की जानकारी लगी कि कालिदास मूर्ख है तो राजकुमारी ने कालिदास का अपमान कर दिया और उनसे अलग हो गईं।

विधोत्मा के धिक्कार के बाद कालिदास बने महान कवि

राजकुमार विधोतमा को जब कालिदास के मंदबुद्धि के बारे में पता चला। तो वह अत्यंत क्रोधित और दुखी हो गईं  उन्होंने कालिदास को धिक्कारते हुए घर से निकाल दिया और कहा कि जब तक सच्चे पंडित ना बन जाना तब तक घर वापस मत आना।
राजकुमारी के धिक्कार से कालिदास बेहद अपमानित हुए और कुंठित होकर इस संकल्प के साथ घर छोड़ दिया कि वह एक सच्चे पंडित और विद्वान बनकर दिखाएंगे। इसी संकल्प के साथ उन्होंने सच्चे मन से काली मां की उपासना शुरू कर दी। कहते हैं कि काली मां के आशीर्वाद से वह परम ज्ञानी और साहित्य के विद्वान बने। आगे चलकर जब वह घर लौटे और अपनी पत्नी को आवाज लगाई। उनकी आवाज से ही राजकुमारी विद्योत्तमा को ऐसा आभास हुआ कि कोई विद्वान व्यक्ति दरवाजे पर आया है।
लेकिन आगे चलकर कालिदास ने पारिवारिक जीवन का त्याग कर दिया। इसी तरह से अपनी पत्नी के द्वारा धिक्कारने के बाद कालिदास को परम ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह दुनिया के महान कवि बन गए। आज उनकी गणना दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कवियों में की जाती है। इतना ही नहीं संस्कृत साहित्य में अभी तक कालिदास का मुकाबला कोई दूसरा कवि नहीं कर पाया है।

संसार के सर्वश्रेष्ठ साहित्यकार हैं कालिदास

कालिदास की गणना केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ साहित्यकारों में की जाती है। कोई भी कालिदास की तरह महाकाव्य और गीतकाव्य की में रचना करने में सक्षम नहीं पाया गया है।
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