Gunjan Saxena- The Kargil Girl Review: फिल्म ‘गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’(Gunjan Saxena- The Kargil Girl) लखनऊ की एक ऐसी बेटी की कहानी है जो देशभक्ति के दौर में अपने सपनों को पूरा करने के लिए जीतोड़ मेहनत करती है। यह कहानी सिर्फ इमोशनल ही नहीं बल्कि कई लड़कियों के लिए बेहद इंस्पायरिंग भी है।

गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’(Gunjan Saxena- The Kargil Girl) जैसी फिल्में इस बात को दर्शाती हैं कि इन कहानियों में लोगों के निजी संघर्ष में कितना बड़ा योगदान है। ऐसे में हमारे देश के रक्षा मंत्रालय को इन सभी बातों का पूरा ख्याल और समर्थन करना चाहिए।

गुंजन के सपनों की उड़ान में कई अड़चन

गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’(Gunjan Saxena- The Kargil Girl) एक तरह से देखा जाए तो सिर्फ कारगिल युद्ध पर आधारित कहानी नहीं है। ये कहानी है तीस साल पहले के लखनऊ में रहने वाली एक लड़की की, जो पायलट बन अपने सपनों की उड़ान भरना चाहती है। मां को लगता है कि कुछ टोटका करने से लड़की के सिर से पायलट बनने का भूत उतर जाएगा। भाई को भी बहन के ये तेवर कुछ सही नहीं लगते। वह कमर्शियल पायलट बनने की कोशिशें शुरू करती है और एक दिन एयरफोर्स पायलट बन जाती है। इस पूरे संघर्ष में जो एक व्यक्ति उसके साथ लगातार बना रहता है वो है उसका पिता, जिसका भारतीय थलसेना में लेफ्टिनेंट कर्नल पद से रिटायर होना शायद उसकी बदली हुई सोच में बड़ी वजह निभाता है।

पकंज त्रिपाठी(Pankaj Tripathi) की बेहतरीन एक्टिंग

Gunjan saxena review

तीस साल पहले के जमाने में आमतौर पर लड़कियों को इस प्रकार के पेशे के लिए घर और समाज से इजाजत नहीं मिलती थी। लेकिन गुंजन के पिता अपनी बेटी को न सिर्फ घर से बाहर जाकर अपनी मर्जी का कुछ करने के लिए प्रेरित करते हैं, बल्कि परिवार के बाकी सदस्यों से लड़कर बेटी के पायलट बनने के सपने के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरते हैं। यह इस फिल्म का सबसे बेहतरीन संदेश है। फिल्म में गुंजन के पिता का किरदार पंकज त्रिपाठी ने निभाया है जो शुरुआती दौर में अपने पुराने किरदारों की एक्टिंग से मैच करते हैं लेकिन समय बीतने के साथ वह धीरे-धीरे किरदार में नई जान फूंक देते हैं। एक मजबूत कलेजे वाले लेकिन भावुक पिता के किरदार में पंकज ने कमाल की एक्टिंग की है।

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जाह्नवी का जवाब नहीं

फिल्म ‘गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’(Gunjan Saxena- The Kargil Girl) को भारतीय समाज के बीच सफल बनाने का श्रेय इसके लेखक निर्देशक शरण शर्मा और इसमें मुख्य भूमिका कर रहीं जाह्नवी कपूर को जाता है। दोनों ने इस फिल्म के लिए अपना शत प्रतिशत दिया है और फिल्म को उसकी आत्मा के करीब रखने में पूरी कामयाबी हासिल की है।

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