Reasons behind Galwan valley war: पूरी दुनिया को तोहफ़े में कोरोना वायरस देने वाला देश चीन अब भारत के साथ युद्ध का माहौल बनाने की भी तैयारी में है। बीते दिनों भारत और चीन के वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों के बीच हुई झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए। दूसरी तरफ चीन के भी करीबन 43 सैनिकों के घायल और मरने की खबर आई है। बता दें कि, बीते एक महीने से भारत और चीन के बीच इस मामले को बिना युद्ध के सुलझाने की बात चल रही थी। लेकिन अचानक ही चीन ने भारतीय सेना पर हमला कर अपने मंसूबों को जगजाहिर कर दिया। यहाँ हम आपको कुछ ऐसे फैक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आधार पर आप जान पाएंगे कि, आखिर गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच बात युद्ध तक कैसे पहुंची।

बीते मई से दोनों देशों के बीच हो रही है झड़प

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Courtesy: PTI Photo

सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, बीते 5 और 6 मई की रात को इस दौरान पहली बार लद्दाख स्थित पैंगोंग झील के पास भारत और चीनी सेना आपस में टकराई। हालाँकि इस टकराव में किसी की जान नहीं गई लेकिन सैनिक घायल जरूर हुए। इसके बाद दोबारा 9 मई को भारत और चीन के सैनिकों के बीच सिक्किम के उत्तर नाकू ला सेक्टर में झड़प हुई जिसमें वापस से दोनों देशों के जवान घायल हुए। आपको बता दें कि, इसके बाद मामला और भी गंभीर होता चला गया जब 12 मई को भारत और चीन के वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब चीन का हेलिकाप्टर देखा गया। गौरतलब है कि, इसके बाद भारतीय सेना ने भी अपने लड़ाकू विमानों को युद्ध के लिए तैयार कर लिए थे लेकिन बाद में चीनी सैनिक वहां से हट गए। इस घटना के बाद भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे लेह के हेडक्वार्टर गए, जहाँ उन्होनें मामले की संज्ञान ली। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के तीनों सेनाध्यक्षों से इन मामले पर बातचीत की। मई के आखिरी दिनों में भारत और चीन के बीच चल रही इस झड़प को सुलझाने के लिए अमेरिका भी बीच में कूद पड़ी। हालाँकि भारत ने इस मामले को बिना किसी युद्ध के सुलझाने की बात पर ही अडिग रहा।

इन वजहों से गई दोनों देशों के जवानों की जान

यहाँ हम आपको मुख्य रूप से स्टेप वाइज बताने जा रहे हैं कि, बीते दिनों किन वजहों से गलवान घाटी में बात इतनी बिगड़ गई की दोनों देशों के जवानों को अपनी जान देनी पड़ी।

  • आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 1 जून को एक बार फिर से भारत और चीन के बॉर्डर के निकट ईस्टर्न लद्दाख से कुछ किलोमीटर दूर चीन के फाइटर हेलिकाप्टर देखे गए।
  • इसके बाद छह जून को एक बार फिर से भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और चीनी मेजर लियु लीन के बीच बॉर्डर पर चल रही हलचलों को सुलझाने के मामले में मोल्डो में बातचीत हुई। बता दें कि, LAC पर मोल्डो को चीन के अधीन आता है। राजनाथ सिंह को भी इस बारे में रिपोर्ट सौंपी गई।
  • बता दें कि, इसी दौरान 11 जून को चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा दोनों देशों के बीच के रिश्तों को शांतिप्रिय ढंग से निपटाने की बात कही। लेकिन दूसरी तरफ लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश की सीमा तक चीनी सैनिकों का जमावड़ा देखा गया। नतीजतन भारत ने भी भाड़ी संख्या में अपने जवान इन इलाकों में तैनात किये।
  • अब 13 जून को एक बार फिर से चीनी आर्मी चीफ ने मीडिया में बयान दिया कि, भारत और चीन शांति पूर्ण ढंग से सीमा विवाद को निपटाने में सक्षम हैं। गलवान घाटी में दोनों देशों के विवाद पर गहन बातचीत की बात भी कही।

लेकिन इसके वाबजूद भी बीते दिनों चीन ने जो हरकत की वो अब सबके सामने है। आगे स्थिति कैसी होगी इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

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