Chhat Puja Song छठ पर्व की बात हो और छठ के गीत का जिक्र न आए, यह कैसे हो सकता है। इन गीत से जुड़ी एक रोचक बात यह है कि ये एक ही लय में गाए जाते हैं और सालोसाल जब भी यह दिन आता है लोकगीत मन में स्वत: गुंजने लगते हैं। यह छठ पर्व गीत जिसकी यहा चर्चा की जा रही है वह भोजपुरी लोकगीतों की गायिका देवी ने गाया है। इतने भावनात्मक अंदाज में उन्होंने इस गीत को गाया है कि इसे सुनकर लोगों की आंखें भर आती हैं।

लोकप्रिय गीत Chhat Puja Song

मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर ( तालाब ) के किनारे यह पूजा की जाती है। षष्ठी मां यानी छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं। इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है।

छठ में सूर्य की आराधना के लिए जिन फलों का प्रयोग होता है, उनमें केला और नारियल का प्रमुख स्थान है। नारियल और केले का पूरा गुच्छा इस पर्व में प्रयुक्त होते हैं। इस गीत में एक ऐसे ही तोते का जिक्र है, जो केले के ऐसे ही एक गुच्छे के पास मंडरा रहा है।

तोते को डराया जाता है कि तुम इस पर चोंच मारोगे तो तुम्हारी शिकायत भगवान सूर्य से कर दी जाएगी, जो तुम्हें माफ नहीं करेंगे, पर फिर भी तोता केले को जूठा कर देता है और सूर्य के कोप का भागी बनता है। पर उसकी भार्या सुगनी अब क्या करे बेचारी? कैसे सहे इस वियोग को? अब तो न देव या सूर्य कोई उसकी सहायता कर सकते आखिर पूजा की पवित्रता जो नष्ट की है उसने।

छठ का लोक गीत

छठ का लोक गीत केरवा जे फरेला घवद से
ओह पर सुगा मेड़राय उ जे खबरी जनइबो अदिक (सूरज) से
सुगा देले जुठियाए उ जे मरबो रे सुगवा धनुक से
सुगा गिरे मुरझाय उ जे सुगनी जे रोए ले वियोग से
आदित होइ ना सहाय देव होइ ना सहाय।
छठ का लोक गीत
कांचे ही बास के बहगिया। बंहगी लचकत जाए।
बाट जे पूछेला बटोहिया। इ दल केकरा के जाए।
आन्हर होइहे रे बटोहिया
इ सूरूज बाबा के जाए।
इ आदित बाबा के जाए।

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