GuruJi Bade Mandir Miracles in Hindi: वैसे तो भारत में कई आध्यात्मिक गुरु हैं, जो संसार को आध्यात्म से जोड़ने का कार्य करते हैं। हर आध्यात्मिक गुरु की अपनी खूबी है और सभी अपने-अपने तरह से लोगों को भक्ति और मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। कुछ गुरु ये काम सीख कर करते हैं तो कुछ लोगों में ये गुण जन्म से ही निहित होता है। कुछ ऐसे ही थे गुरु जी। जी हां, हम बात कर रहे हैं दिल्ली के छत्तरपुर वाले गुरु जी की जिनके प्रति लोगों की अपार भक्ति और श्रद्धा है। कहा जाता है कि हर युग में कोई न कोई अवतार आया जिन्होंने सबको पार लगाया। इस कलयुग में शिव ही हमें भवसागर पार करा सकते हैं। मानव जाति के उत्थान के लिए स्वयं शिवजी को मानव रूप में आना पड़ा है। शिव की महिमा का गुणगान बिना शिव की इच्छा के कोई भी नहीं कर सकता और ऐसा प्रतीत होता है कि शिवजी के रूप में गुरु जी आए।

guruji bade mandir miracles in hindi

7 जुलाई, 1952 को पंजाब के संगरूर जिले के डुगरी गांव में गुरु जी का जन्म हुआ और आपको यह सुनकर काफी आश्चर्य होगा कि गुरुजी में बचपन से ही एक अलग ही प्रकार की शक्ति थी। वह एक चिंगारी थे जिसे दीप बनने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगा। गुरुजी ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में ही प्राप्त की। गुरु जी की महानता उस वक्त से ही दिखने लगी जब माता-पिता के लाख चाहने के बाद भी उन्होंने अपने अध्ययन कार्य को बिना किसी बाधा के पूरा किया और तब स्वयं उनके माता-पिता को इस बात का एहसास हुआ कि ये कोई साधारण बालक नहीं है। वे खुद उनके चरण स्पर्श करने लगे और उन्हें गुरुजी कह कर पुकारते।

कुछ समय बाद गुरुजी ने समस्त संसार में अपनी आध्यात्मिक यात्रा को पूरा करने के लिए घर परिवार का त्याग कर दिया। वह अक्सर अपने परिचितों के घर जाते, कुछ दिनों तक वक़्त गुजारते और फिर निकल जाते अपने आगे के सफर के लिए। जाने उनके अंदर ऐसी कौन सी शक्ति थी की दूर-दूर से लोग उनके पास आते थे अपनी तमाम समस्याओं और बीमारियों को लेकर और यकीन मानिए सभी ठीक होकर ही वापस जाते थे। मगर इन सब बातों से गुरुजी को कोई फर्क नहीं पड़ता था। बहुत जल्द ही उनकी शक्तियों की खबरें पूरे पंजाब में फैल गईं। लोगों ने कभी यह नहीं सोचा कि गुरुजी कहां रहते हैं और कैसे रहते हैं। वह तो बस उनके तेज से आकर्षित थे।

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गुरुजी के चमत्कार भी बड़े ही अनोखे हैं। ऐसी ही एक घटना है जब उनका एक अनुयाई, जिसने उनके बारे में बचपन से सुन रखा था और उनसे काफी प्रभावित भी था, अक्सर ही उनके सत्संग को बड़ा मन लगा कर सुना करता था। एक रोज वह गुरुजी के पास पहुंचता है और अपने मन ही मन गुरुजी से कहता है,मैं आपको तब गुरु मानूंगा जब आप चंडीगढ़ में एक व्यापारी के पास अटके हुए मेरे पांच लाख रुपये वापिस दिला देंगे। उसने मुख से तो नहीं मगर अपने मन से यह बात बोल दी। हालांकि, उसे अगले ही पल एहसास हुआ कि उसने यह क्या कह दिया। थोड़े से धन के लिए ऐसी शर्त रख दी। बाद में उसने स्वयं उनसे विनती कर क्षमा याचना की और कहने लगा कि इस धन के लिए मुझे आपकी सहायता नहीं चाहिए। शायद इसे चमत्कार ही कहा जाएगा कि करीब एक सप्ताह के बाद जब वह बंगलौर शहर में था उस दौरान उसे उस व्यापारी का फोन आया। उसने कहा कि वह पैसा वापिस दे देगा और साथ में 3000 रूपये ब्याज भी देगा।

ऐसा ही एक और वाकया है जब एक व्यक्ति की पत्नी, जिसे अक्सर ही रह-रह कर चक्कर आता था और अधासीसी के दर्द होते रहते थे। पत्नी के इलाज के लिए वह न सिर्फ देश के बड़े-बड़े अस्पताल में गया बल्कि अमेरिका जैसे उन्नत देश में भी रोग सही कराने का प्रयास किया। लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिल पा रही थी। बाद में उसने होम्योपैथ का सहारा लेकर रोग को दबा तो लिया मगर पूर्ण रूप से इलाज नहीं हो पाया। तत्पश्चात वह गुरुजी की संगत में आया और तकरीबन एक माह के बाद सिर्फ मन ही मन यह निवेदन किया कि किसी भी तरह से उसकी पत्नी के रोग का निवारण हो जाए। यकीन मानिए मात्र 15 दिनों के भीतर पहले तो पत्नी की होम्योपैथ वाली औषधि छूटी और फिर कुछ ही समय में पत्नी पूरी तरह से पहले की तरह स्वस्थ हो गयी। यकीनन यह चमत्कार गुरुजी की कृपा से ही हुआ। ऐसे एक या दो नहीं बल्कि हजारों उदाहरण हैं, जो यह साफ-साफ जताते हैं कि गुरुजी के चमत्कार से एक-दो या चंद लोगों को नहीं बल्कि लाखों लोगों को लाभ मिला है और वह भी निःस्वार्थ रूप से।

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