Rules of Football in Hindi: फुटबॉल…..यानि वो खेल जो हर पल रोमांच से भर देता है। इसे खेलने वाले का जोश और होश दोनों में होना बेहद ज़रूरी होता है। वरना बाज़ी पलटते देर नहीं लगती। ये टीम स्पोर्ट है जिसे दुनिया भर में खेला जाता है और इसके फैन हर जगह मौजूद है। धीरे-धीरे भारत में भी फुटबॉल को लेकर दीवानगी बढ़ती ही जा रही है। इस खेल में दोनों टीमों में 11-11 खिलाड़ी होते हैं जो विरोधी टीम के पाले में गोल दागने में जुटे रहते हैं। 90 मिनट का ये खेल आपको उत्साह से भर देता है। तो चलिए जानते हैं इस खेल के नियम

कैसे खेला जाता है फुटबॉल (How to Play Football)

फुटबॉल मैच दो टीमों के बीच खेला जाता है जिसमें दोनों टीमों में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। दोनों टीमों के 11-11 खिलाड़ी अपने गोल पोस्ट पर गोल बचाने और दूसरे गोल पोस्ट में गोल दागने की कोशिश करते हैं। कुल  90 मिनट के इस खेल में 45-45 मिनट के 2 हाफ होते हैं। इन दोनों हाफ में कुछ एक्स्ट्रा टाइम भी निकलता है। जो ज़रूरत होने पर यूज़ किया जाता है। जिस तरह क्रिकेट में अंपायर होते हैं उसी तरह फुटबॉल के खेल में रेफरी को सारी अथॉरिटी है और रैफरी का फैसला ही अंतिम माना जाता है। मैच के दौरान  सहायक रेफरी भी होता है जो रेफरी की मदद करता है। खेल शुरू होने का फैसला टॉस करके लिया जाता है। इसमें टॉस जीतने वाला कप्तान ही तय करता है कि उसकी टीम गोल पोस्ट पर अटैक करना चाहती है या फिर बॉल को किक ऑफ यानि किक मारना चाहती है। जब भी मैच में कोई गोल होता है तो बॉल को सेंटर लाइन पर रखकर दोबारा खेल शुरू किया जाता है।

फुटबॉल खेलने के नियम [Football Rules in Hindi]

चलिए अब आपको बताते हैं कि टीम का फुटबॉल के मैच में स्ट्राइकर, डिफेंडर्स और मिडफिल्डर्स शब्दों का इस्तेमाल किनके लिए किया जाता है।

स्ट्राइकर – इनका  मुख्य काम गोल मारना होता है।

डिफेंडर्स – अपनी विरोधी टीम के सदस्यों को गोल स्कोर करने से रोकने वाले को डिफेंडर्स कहते है।

मिडफिल्डर्स –  विरोधी टीम से बॉल छीन कर अपने आगे खेलने वाले प्लेयर्स को बॉल देने का काम मिडफिल्डर्स करते हैं।

गोलकीपर – गोल कीपर का काम गोल होने से रोकना है। लेकिन ये काम उसे गोल पोस्ट के सामने खड़े रहकर ही करना होता है।

फुटबॉल किक

थ्रो-इन – इसमें बॉल पूरी तरह से रेखा पार कर जाती है। तब उस विरोधी टीम को इनाम में मिलती है, जो बॉल आखिरी बार छूए।

गोल किक –  जब बॉल पूरी तरह गोल रेखा को पार कर जाए तो गोल के बिना ही स्कोर होता है और अटैकर द्वारा बॉल को आखिरी बार छूने के कारण डिफेंस करने वाली टीम को इनाम में किक करने का मौका मिलता है।

कॉर्नर किक – जब बॉल बिना गोल के ही गोल रेखा को पार कर जाती है और डिफेंस करने वाली टीम द्वारा बॉल को आखिरी बार छूने के कारण हमलावर टीम को मौका मिलता है।

इनडायरेक्ट फ्री किक: यह विरोधी टीम को इनाम में मिलती है, जब बिना किसी विशेष फाउल के बॉल को बाहर भेज दिया जाए और खेल रुक जाए।

फुटबॉल में फाउल के नियम [Rules of Football in Hindi]

येलो कार्ड – रेफरी प्लेयर को उसके गलत बर्ताव के लिए सज़ा के रूप में Yellow Card दिखाकर मैदान के बाहर भेज सकता है।

रेड कार्ड –  येलो कार्ड के बाद भी बर्ताव ना सुधारे जाने पर रेड कार्ड दिया जाता है और रेड कार्ड का मतलब है मैदान से बाहर। अगर एक प्लेयर को बाहर निकाल दिया जाता है तो उसकी जगह कोई दूसरा प्लेयर नहीं आ सकता। इस तरह प्लेयर की संख्या कम हो जाती है।

ऑफसाइड – ऑफ साइड नियम में आगे के प्लेयर बॉल के बिना बचाव करते हुए दूसरे प्लेयर के आगे नहीं जा सकते, खासकर विरोधी टीम की गोल रेखा के एकदम पास। अगर कोई खिलाड़ी ऐसा करे तो उसे फाउल माना जाता है।

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