Eiffel Tower History in Hindi: एफिल टावर जिसे अब फ्रांस की पहचान के तौर पर जाना जाता है। इसके निर्माण के पीछे एक लंबी कहानी है। दरअसल एफिल टावर का निर्माण 1887 ईस्वी में फ्रांस की क्रांति के 100 साल पूरे हो जाने की खुशी में किया गया था। इस टावर को बनाने से पहले फ्रांस की सरकार ने कुछ शर्तें रखी थी। जिसे ध्यान में रखकर ही इसका निर्माण किया गया है। सरकार द्वारा दिए गए शर्तों को ध्यान में रखते हुए। इंजीनियर मॉरिस कोएचलीं और एमिली नौगुइएर ने एफिल टावर के डिजाइन और ढांचे पर काम करना शुरू कर दिया।

दोनों ने मिलकर टावर के लिए कई अलग-अलग तरह के डिजाइन पेश किए। इन डिजाइंस को कई विशेषज्ञों के सामने पेश किया गया। कुछ लोगों ने इसकी सराहना की तो कुछ लोगों को यह डिजाइन बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। इसके बाद दोनों इंजीनियरों ने एक लंबे समय तक टावर के डिजाइन में काफी सुधार किया। फिर भी बात नहीं बनी, इसके बाद इस टावर को बनाने में जाने माने आर्किटेक्चर और इंजीनियर “गुस्ताव एफिल” ने मदद की।

eiffel tower history in hindiआपकी जानकारी के लिए बता दें कि गुस्ताव एफिल वही शख्स हैं। जिन्होंने स्टैचू ऑफ लिबर्टी के अंदरूनी भाग को डिजाइन किया है। गुस्ताव एफिल ने सरकार द्वारा दिए गए सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए एक बेहतरीन डिजाइन का निर्माण किया। इसके बाद ऐसी करीब 107 डिजाइन में से गुस्ताव एफिल के डिजाइन का चुनाव हुआ। गुस्ताव ने पेरिस की मशहूर एफिल टावर के इस डिजाइन का पेटेंट हासिल कर लिया। साल 1884 में इस डिजाइन को प्रदर्शनी में रखा गया। हालांकि एग्जिबिशन में इस डिजाइन को कंपनी के नाम पर ही रखा गया। 30 मार्च 1885 को कंपनी ने गुस्ताव को इस डिजाइन से संबंधित बनावट और समस्याओं के बारे में अपने विचार प्रकट करने को कहा। गुस्ताख ने कहा ”यह टॉवर न सिर्फ मॉडर्न और आधुनिक इंजीनियर की कला होगी बल्कि, यह विज्ञान और कारोबार के क्षेत्र में एक नया चमत्कार होगा। इसके साथ ही गुस्ताव एफिल ने यह भी कहा कि अगर यह टॉवर बनेगा तो यह फ्रांस की पहचान बनेगा” और आखिरकार यही हुआ आज यह टावर फ्रांस पहचान का प्रतीक बना हुआ है। साल 1886 में जूल्स ग्रेवी फ्रांस के प्रेसिडेंट नियुक्त किए गए। इसके साथ ही एफिल टावर के डिजाइन में कुछ और भी बदलाव किए गए साथ ही इसका बजट भी तय किया गया।

एफिल टावर बनाने के लिए क्या नियम तय किए थे सरकार ने

एफिल टावर का बजट पास होने के बाद गुस्ताव एफिल को टावर के निर्माण के जगह को लेकर एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करना पड़ा जिसमें कई सारे नियम तय किए गए थे। उनके मुताबिक ”एफिल टॉवर में सिर्फ एफिल कंपनी का ही शेयर होगा और इस टॉवर का प्रतिनिधित्व भी कंपनी ही करेगी।””एफिल टॉवर के निर्माण के करीब 20 साल बाद इसे नष्ट कर दिया जाएगा।” गुस्ताव ने सरकार के इन नियमों को मानते हुए साल 1987 में टावर के निर्माण का काम शुरू करवाया। इस दौरान फ्रांस सरकार ने भी इस टावर के निर्माण के लिए करीब 1.5 मिलियन राशि सहायता के लिए प्रदान किए।करीब 2 साल 2 महीने 5 दिन तक लगातार एफिल टावर के निर्माण का काम चला। साल 1889 में टावर का निर्माण पूरी तरह खत्म हुआ। गुस्ताव एफिल ने जैसा सोचा था। बिल्कुल उसी तरह से एफिल टावर का निर्माण कार्य समाप्त हुआ और अंत में इस टावर का नाम इंजीनियर के नाम पर ही एफिल टावर रखा गया। कुछ लोग कहते हैं, इस टावर के निर्माण कार्य के दौरान इंजीनियर गुस्ताव ने काफी रुपए कमा लिए थे। लेकिन जब इस टावर के आधुनिकरण और विस्तार का काम आया तो गुस्ताव ने यह कॉन्ट्रैक्ट किसी दूसरी कंपनी को दे दिया। फिलहाल टावर बेहद ही मजबूती के साथ पेरिस की आन, बान और शान बना हुआ है।
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एफिल टावर के निर्माण में किस धातु का हुआ है इस्तेमाल

बेहद आकर्षक और मजबूत एफिल टावर का निचला भाग वर्ग के आकार में बना हुआ है। जिसे बनाने में मेटल का इस्तेमाल किया गया है। यह टावर करीब 18000 लोहे के टुकड़ों और 2.5 मिलियन कील की सहायता से बना है। इसे बेहद खास तरीके से असेंबल किया गया है। यही कारण है कि यह टावर वर्षों से मजबूती के साथ खड़ा है।

टावर की चोटी पर पहुंचने के लिए चढ़नी पड़ती है करीब डेढ़ हजार सीढ़ियां

टावर के सबसे आखिरी हिस्से का नाम परइसकी चोटी है। जहां तक पहुंचने के लिए करीब 1 हजार 665 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। इसकी मदद से ही टावर के टॉप पर पहुंचा जा सकता है। हालांकि पर्यटकों के लिए इस टावर में लिफ्ट की सुविधा भी दी गई है। एक अध्ययन के मुताबिक यह लिफ्ट एक साल में करीब 103000 किलोमीटर का सफर तय करती है। जोकि पृथ्वी की परिधि से ढाई गुना ज्यादा है। पेरिस की शान एफिल टावर में लगे लिफ्ट को केवल एक बार नीचे से ऊपर तक ले जाने में 15 यूरो खर्च होता है।

एफिल टावर की पहली और दूसरी मंजिल का निर्माण और आकार

एफिल टावर की पहली मंजिल का क्षेत्रफल करीब 4200 वर्ग मीटर का है। टावर की इस मंदिर के चारों तरफ एक जालीदार छज्जा बना हुआ है। इस मंजिल पर यात्रियों के लिए दूरबीन की सुविधा भी रखी गई है। ताकि यहां आने वाले यात्री दूरबीन की मदद से पेरिस की खूबसूरती को निहार सकें। टावर की दूसरी मंजिल का क्षेत्रफल 1650 वर्ग मीटर है। इतनी ऊंचाई से लोग खुली आंखों से पूरे पेरिस का दीदार कर सकते हैं।

एफिल टावर की ऊंचाई

एफिल टावर के हर किनारे की लंबाई करीब 125 मीटर है। जबकि इसके एंटीना की ऊंचाई 116 मीटर है। अगर इस पूरे टावर की ऊंचाई की बात करें तो यह करीब 324 मीटर है यानी कि 1063 फीट। जो कि करीब 81 मंजिला इमारत के बराबर होती है। वहीं इस टावर का ऊपरी हिस्सा करीब 6 से 7 सेंटीमीटर हवा में झूलता है। इस टावर के समुद्र तल से ऊंचाई की बात करें तो यह करीब 335 मीटर है। जिस दौरान इस टॉवर का निर्माण हुआ था। उस दौरान यह विश्व की सबसे ऊंची इमारत थी।

रात के वक्त फोटो खींचना है गैरकानूनी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप पेरिस के इस एफिल टावर का दीदार करने जाते हैं। तो रात के वक्त इसका फोटो ना खींचे। नहीं तो आपको जेल जाना पड़ सकता है। अगर आपको रात के वक्त यहां फोटो खींचनी है तो इसके लिए आपको यहां के संचालकों की अनुमति लेनी पड़ेगी। एफिल टावर पर लगी लाइट्स की डिजाइन पर उनके कलाकारों का कॉपीराइट है और यूरोप के कॉपीराइट कानून के तहत कॉपीराइट वाली चीजों का फोटो खींचना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
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